महाराजा-महारानी कॉलेज की जमीन हस्तांतरण पर सियासी घमासान, विधानसभा में गूंजा मामला
राजस्थान विश्वविद्यालय के महाराजा और महारानी कॉलेज की जमीन को जेडीए और नगर निगम को हस्तांतरित करने का मामला अब तूल पकड़ता जा रहा है। यह विवाद सोमवार को राजस्थान विधानसभा में भी गूंजा, जहां पक्ष और विपक्ष के विधायकों ने सरकार से जवाब मांगा और दोषी अधिकारियों के खिलाफ कार्रवाई की मांग की।
विधानसभा में इस मुद्दे को उठाते हुए भाजपा विधायक कालीचरण सराफ, कांग्रेस विधायक मनीष यादव और आरएलडी विधायक सुभाष गर्ग ने सरकार को घेरा। विधायकों ने आरोप लगाया कि कॉलेज की महत्वपूर्ण जमीन को बिना उचित प्रक्रिया के हस्तांतरित किया गया, जो गंभीर मामला है।
विधायकों ने कहा कि महाराजा और महारानी कॉलेज प्रदेश के प्रतिष्ठित शैक्षणिक संस्थान हैं और उनकी जमीन का इस तरह हस्तांतरण शिक्षा हितों के खिलाफ है। उन्होंने सरकार से इस पूरे मामले की जांच कराने और जिम्मेदार अधिकारियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई करने की मांग की।
सदन में इस मुद्दे पर चर्चा के दौरान विधायकों ने सरकार से स्पष्ट करने को कहा कि जमीन हस्तांतरण का निर्णय किन परिस्थितियों में और किस उद्देश्य से लिया गया। साथ ही यह भी पूछा गया कि क्या इस प्रक्रिया में सभी नियमों और प्रक्रियाओं का पालन किया गया था या नहीं।
इस मामले के सामने आने के बाद शिक्षा जगत और छात्र संगठनों में भी नाराजगी देखी जा रही है। छात्रों और शिक्षकों का कहना है कि कॉलेज की जमीन संस्थान की संपत्ति है और इसका उपयोग केवल शैक्षणिक उद्देश्यों के लिए ही किया जाना चाहिए।
राजनीतिक जानकारों का मानना है कि यह मामला आने वाले समय में और अधिक तूल पकड़ सकता है, क्योंकि इसमें शिक्षा संस्थान की जमीन और सरकारी एजेंसियों की भूमिका से जुड़े गंभीर सवाल उठ रहे हैं।
फिलहाल, सरकार की ओर से इस मामले में विस्तृत जवाब और संभावित जांच को लेकर सभी की नजरें टिकी हुई हैं। आने वाले दिनों में इस मुद्दे पर और सियासी बहस तेज होने की संभावना है।
राजस्थान विश्वविद्यालय के महाराजा और महारानी कॉलेज की जमीन को जेडीए और नगर निगम को हस्तांतरित करने का मामला अब तूल पकड़ता जा रहा है। यह विवाद सोमवार को राजस्थान विधानसभा में भी गूंजा, जहां पक्ष और विपक्ष के विधायकों ने सरकार से जवाब मांगा और दोषी अधिकारियों के खिलाफ कार्रवाई की मांग की।
विधानसभा में इस मुद्दे को उठाते हुए भाजपा विधायक कालीचरण सराफ, कांग्रेस विधायक मनीष यादव और आरएलडी विधायक सुभाष गर्ग ने सरकार को घेरा। विधायकों ने आरोप लगाया कि कॉलेज की महत्वपूर्ण जमीन को बिना उचित प्रक्रिया के हस्तांतरित किया गया, जो गंभीर मामला है।
विधायकों ने कहा कि महाराजा और महारानी कॉलेज प्रदेश के प्रतिष्ठित शैक्षणिक संस्थान हैं और उनकी जमीन का इस तरह हस्तांतरण शिक्षा हितों के खिलाफ है। उन्होंने सरकार से इस पूरे मामले की जांच कराने और जिम्मेदार अधिकारियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई करने की मांग की।
सदन में इस मुद्दे पर चर्चा के दौरान विधायकों ने सरकार से स्पष्ट करने को कहा कि जमीन हस्तांतरण का निर्णय किन परिस्थितियों में और किस उद्देश्य से लिया गया। साथ ही यह भी पूछा गया कि क्या इस प्रक्रिया में सभी नियमों और प्रक्रियाओं का पालन किया गया था या नहीं।
इस मामले के सामने आने के बाद शिक्षा जगत और छात्र संगठनों में भी नाराजगी देखी जा रही है। छात्रों और शिक्षकों का कहना है कि कॉलेज की जमीन संस्थान की संपत्ति है और इसका उपयोग केवल शैक्षणिक उद्देश्यों के लिए ही किया जाना चाहिए।
राजनीतिक जानकारों का मानना है कि यह मामला आने वाले समय में और अधिक तूल पकड़ सकता है, क्योंकि इसमें शिक्षा संस्थान की जमीन और सरकारी एजेंसियों की भूमिका से जुड़े गंभीर सवाल उठ रहे हैं।
फिलहाल, सरकार की ओर से इस मामले में विस्तृत जवाब और संभावित जांच को लेकर सभी की नजरें टिकी हुई हैं। आने वाले दिनों में इस मुद्दे पर और सियासी बहस तेज होने की संभावना है।