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कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष गोविंद सिंह डोटासरा की वापसी से सियासी हलचल

 

राजस्थान विधानसभा में पिछले दो सत्रों से कार्यवाही से दूर चल रहे राजस्थान प्रदेश कांग्रेस कमेटी (Rajasthan PCC) के अध्यक्ष गोविंद सिंह डोटासरा अब सदन में वापसी करने जा रहे हैं। 26 जनवरी को NDTV राजस्थान से बातचीत में डोटासरा ने खुद इसकी पुष्टि की, जिससे सत्ता पक्ष और विपक्ष के बीच राजनीतिक टकराव के नए संकेत सामने आए हैं।

गोविंद सिंह डोटासरा के इस कदम को राजनीतिक विशेषज्ञ संदेश और सियासी रणनीति दोनों के रूप में देख रहे हैं। पिछले दो सत्रों में डोटासरा की गैर-मौजूदगी ने विधानसभा में कांग्रेस की आवाज़ को कमजोर किया था, लेकिन अब उनकी वापसी से विपक्ष की सक्रियता और जोर बढ़ सकता है।

डोटासरा ने संवाद में कहा कि उनका मकसद राजस्थान के विकास और जनता के मुद्दों पर जोर देना है। उन्होंने यह भी कहा कि कांग्रेस सदन में मजबूती के साथ भाग लेने के लिए तैयार है। उनकी वापसी से यह साफ़ हो गया है कि आगामी सत्र में सत्ता पक्ष और विपक्ष के बीच बहस और टकराव बढ़ सकते हैं।

राजनीतिक विश्लेषकों का कहना है कि डोटासरा की वापसी विपक्ष को एक नई ऊर्जा और दिशा दे सकती है। उन्होंने यह भी कहा कि सत्ता पक्ष को भी इस चुनौती का सामना करने के लिए रणनीति बदलनी पड़ सकती है। विधानसभा में कानून निर्माण और विभिन्न मुद्दों पर बहस के दौरान टकराव की संभावना बढ़ गई है।

विपक्ष के नेताओं का मानना है कि डोटासरा के आने से सवाल-जवाब और सवाल उठाने की प्रक्रिया और अधिक प्रभावी होगी। वहीं, सत्ता पक्ष के नेता भी इसके लिए पूरी तरह से तैयार हैं। उन्होंने कहा कि विधानसभा की कार्यवाही सहज और व्यवस्थित रूप से चलानी होगी, ताकि किसी भी प्रकार का हंगामा रोका जा सके।

राजस्थान की राजनीति में डोटासरा की यह वापसी महत्वपूर्ण मोड़ मानी जा रही है। पिछले दो सत्रों में उनकी गैर-मौजूदगी ने कांग्रेस को कई बार मजबूर किया था कि वह अपने विधायकों को सही समय पर सक्रिय करे। अब उनकी सक्रिय उपस्थिति से सदन में विपक्ष की ताकत बढ़ेगी और सरकार के खिलाफ बहस और कठोर हो सकती है।

विशेषज्ञों का कहना है कि विधानसभा में डोटासरा की वापसी राजनीतिक समीकरण बदल सकती है। उनका कहना है कि अगले सत्र में बहस के दौरान जनता के मुद्दों, विकास योजनाओं और सरकारी नीतियों पर विशेष ध्यान रहेगा।

डोटासरा के इस निर्णय ने सियासी माहौल को गरमा दिया है। राजनीतिक पंडितों का कहना है कि सत्ता पक्ष और विपक्ष के बीच संसदीय बहस और टकराव अगले सत्र का मुख्य आकर्षण रहेगा। इसके अलावा, कांग्रेस की रणनीति भी अब और सशक्त होगी।

इस प्रकार, राजस्थान विधानसभा के आगामी सत्र में गोविंद सिंह डोटासरा की वापसी सियासी हलचल और विपक्ष की सक्रियता का नया अध्याय साबित होने जा रही है।