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पानी की रॉयल्टी पर सियासी टकराव, पंजाब सीएम की मांग से राजस्थान में विवाद

 

पंजाब के मुख्यमंत्री भगवंत मान द्वारा राजस्थान से पानी की रॉयल्टी के रूप में 1.44 लाख करोड़ रुपये की मांग किए जाने के बाद एक नया विवाद खड़ा हो गया है। उनके इस बयान ने दोनों राज्यों के बीच चर्चा और राजनीतिक बहस को तेज कर दिया है।

मुख्यमंत्री भगवंत मान ने इस मुद्दे को गंभीर बताते हुए कहा है कि वे इसे न्याय के लिए कोर्ट में ले जाने की तैयारी कर रहे हैं। उनका दावा है कि राजस्थान से पंजाब को पानी के उपयोग के बदले यह रॉयल्टी मिलनी चाहिए। इस मांग के पीछे उन्होंने 1920 के एक पुराने समझौते का हवाला दिया है।

मान का तर्क है कि 4 सितंबर 1920 को शिमला में ब्रिटिश शासन के दौरान पंजाब, बीकानेर रियासत और बहावलपुर रियासत के बीच एक समझौता हुआ था, जिसे सतलज घाटी परियोजना के रूप में भी जाना जाता है। इसी समझौते के आधार पर वे रॉयल्टी की मांग कर रहे हैं।

वहीं, राजस्थान सरकार ने इस पूरे मामले को सिरे से खारिज कर दिया है। राज्य सरकार का कहना है कि यह केवल एक राजनीतिक बयानबाजी है और इसका कोई वास्तविक या कानूनी आधार नहीं है। राजस्थान ने इस मांग को बेतुका करार देते हुए कहा है कि ऐसे दावे व्यावहारिक और स्वीकार्य नहीं हैं।

इस मुद्दे के सामने आने के बाद दोनों राज्यों के बीच तनावपूर्ण बहस शुरू हो गई है। विशेषज्ञों का मानना है कि पानी जैसे संवेदनशील मुद्दों पर इस तरह के विवाद भविष्य में और भी जटिल हो सकते हैं।

फिलहाल यह मामला राजनीतिक और कानूनी दोनों स्तरों पर चर्चा का विषय बन गया है। अब सभी की नजरें इस बात पर टिकी हैं कि यह विवाद आगे क्या मोड़ लेता है और कोर्ट में इस पर क्या निर्णय आता है।