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जयपुर के एसएमएस अस्पताल में मरीजों का काट-छांट, वीडियो में देंखे पैर कटे मरीज को इलाज के लिए चक्कर लगाने पड़े

 

सवाई मानसिंह अस्पताल (SMS) के ट्रोमा सेंटर की व्यवस्था हाल ही में फिर से सवालों के घेरे में आ गई है। गंभीर रूप से घायल और हाथ-पांव कटे मरीजों को सीधे इलाज या ऑपरेशन के बजाय रेफरेंस के लिए भेजा जा रहा है। इस व्यवस्था के चलते मरीज और उनके परिजन गंभीर हालात में भी कई जगह चक्कर काटने को मजबूर हो रहे हैं।

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अस्पताल के ट्रोमा सेंटर में भर्ती मरीजों को डॉक्टर अक्सर अन्य विभागों के रेफरेंस के लिए मुख्य बिल्डिंग में भेजते हैं। गंभीर हालत में मरीज को एम्बुलेंस में धनवंतरी ओपीडी लाना पड़ता है, जहां परिजन लंबे समय तक इंतजार करने के बाद रेफरेंस ले पाते हैं। यह व्यवस्था तब भी लागू है जब रेफरेंस सिस्टम पूरी तरह ऑनलाइन है और डॉक्टर सीधे मरीज के बिस्तर पर जाकर उन्हें देख सकते हैं।

हाल ही में टोंक जिले के 30 वर्षीय युवक देशराज इसका उदाहरण बने। 9 मार्च को एक सड़क दुर्घटना में गंभीर रूप से घायल हुए देशराज का एक पैर कट गया था, जबकि दूसरा पैर भी गंभीर रूप से चोटिल था। इसके बाद, 12 मार्च को उन्हें रेफरेंस के लिए धनवंतरी ओपीडी भेजा गया।

परिजनों ने बताया कि उन्हें बड़ी मुश्किल से एम्बुलेंस में मरीज को बैठाकर ओपीडी तक पहुंचाना पड़ा। वहां करीब एक घंटा इंतजार करने के बाद जाकर सर्जरी विभाग के डॉक्टर ने उन्हें देखा और रेफरेंस प्रदान किया। इस दौरान मरीज और उसके परिजनों की परेशानियां और असुविधाएं स्पष्ट रूप से सामने आईं।

विशेषज्ञों का कहना है कि ऐसे मामलों में समय की बहुत अधिक अहमियत होती है, खासकर जब मरीज गंभीर चोटिल हो और पैर कट चुका हो। समय पर सही इलाज नहीं मिलने से मरीज की स्थिति गंभीर हो सकती है और स्थायी नुकसान भी हो सकता है।

अस्पताल में मौजूद कुछ चिकित्सकों ने बताया कि ऑनलाइन रेफरेंस सिस्टम लागू होने के बावजूद पारंपरिक प्रक्रिया को जारी रखना मरीजों के लिए समस्या बन रहा है। डॉक्टरों के लिए यह सुविधाजनक हो सकता है, लेकिन मरीज और परिजन को असुविधा झेलनी पड़ती है।

परिजन और मरीज संघटनाओं का कहना है कि अस्पताल प्रशासन को तुरंत सिस्टम सुधार करना चाहिए ताकि गंभीर हालात में मरीज को चक्कर नहीं लगाना पड़े। इसके अलावा, ट्रोमा सेंटर और मुख्य बिल्डिंग के बीच समन्वय बढ़ाया जाना चाहिए और डॉक्टरों को मरीज के बिस्तर पर ही इलाज करने के लिए प्राथमिकता देनी चाहिए।

SMS अस्पताल राजस्थान का प्रमुख अस्पताल है और राज्यभर से गंभीर रोगियों और दुर्घटना पीड़ितों को यहां लाया जाता है। ऐसे में ट्रोमा सेंटर में प्रभावी और त्वरित उपचार की व्यवस्था अत्यंत महत्वपूर्ण है। विशेषज्ञों के अनुसार, मरीजों की असुविधा को कम करने और उपचार की गति बढ़ाने के लिए ऑनलाइन रेफरेंस सिस्टम का पूरा इस्तेमाल किया जाना चाहिए।

देशराज के मामले ने एक बार फिर अस्पताल की प्रक्रियाओं पर सवाल खड़े कर दिए हैं। परिजन और समाज इस मामले को गंभीरता से देख रहे हैं और प्रशासन से शीघ्र सुधार की उम्मीद कर रहे हैं।