आरटीई प्रवेश प्रक्रिया में पैन कार्ड अनिवार्य, नए नियमों से अभिभावकों में बढ़ी चिंता
राजस्थान में राइट टू एजुकेशन (आरटीई) के तहत निजी स्कूलों में होने वाले मुफ्त प्रवेश को लेकर इस वर्ष नया विवाद खड़ा हो गया है। शिक्षा विभाग ने आवेदन प्रक्रिया में पैन कार्ड की कॉपी को अनिवार्य दस्तावेजों की सूची में शामिल कर दिया है। इसके साथ ही आय प्रमाण-पत्र में किसी प्रकार की गड़बड़ी मिलने पर प्रवेश निरस्त करने, दोगुनी फीस वसूलने और एफआईआर दर्ज कराने की चेतावनी भी जारी की गई है। इन नए नियमों के बाद अभिभावकों और शिक्षा से जुड़े संगठनों में चिंता और असमंजस का माहौल बन गया है।
दरअसल, आरटीई के तहत आर्थिक रूप से कमजोर और वंचित वर्ग के बच्चों को निजी स्कूलों में 25 प्रतिशत सीटों पर मुफ्त शिक्षा का अधिकार दिया जाता है। हर साल हजारों अभिभावक अपने बच्चों के बेहतर भविष्य की उम्मीद में इस योजना के तहत आवेदन करते हैं। लेकिन इस बार शिक्षा विभाग द्वारा जारी दिशा-निर्देशों में पैन कार्ड को अनिवार्य कर देने से कई परिवारों के सामने नई परेशानी खड़ी हो गई है।
ग्रामीण क्षेत्रों और गरीब परिवारों के कई अभिभावकों के पास अभी तक पैन कार्ड नहीं है। ऐसे में उन्हें आवेदन प्रक्रिया पूरी करने में कठिनाई का सामना करना पड़ रहा है। कई अभिभावकों का कहना है कि पैन कार्ड बनवाने में समय लगता है और आवेदन की अंतिम तिथि नजदीक होने के कारण वे समय पर दस्तावेज जमा नहीं कर पा रहे हैं। इससे उनके बच्चों के प्रवेश की संभावना भी प्रभावित हो सकती है।
इसके अलावा शिक्षा विभाग ने आय प्रमाण-पत्र को लेकर भी सख्त रुख अपनाया है। विभाग की ओर से स्पष्ट किया गया है कि यदि जांच के दौरान आय प्रमाण-पत्र में किसी प्रकार की गलत जानकारी या फर्जी दस्तावेज पाए जाते हैं, तो संबंधित बच्चे का प्रवेश तुरंत निरस्त कर दिया जाएगा। इतना ही नहीं, स्कूल द्वारा ली जाने वाली फीस की दोगुनी राशि अभिभावकों से वसूली जाएगी और उनके खिलाफ कानूनी कार्रवाई करते हुए एफआईआर भी दर्ज कराई जा सकती है।
शिक्षा विभाग का कहना है कि यह कदम पारदर्शिता बनाए रखने और योजना का लाभ सही पात्र लोगों तक पहुंचाने के उद्देश्य से उठाया गया है। विभाग के अधिकारियों के अनुसार पिछले कुछ वर्षों में फर्जी दस्तावेजों के आधार पर आरटीई के तहत प्रवेश लेने के कई मामले सामने आए थे। इसी कारण इस बार दस्तावेजों की जांच को सख्त बनाया गया है।
हालांकि सामाजिक संगठनों और शिक्षा अधिकार कार्यकर्ताओं का मानना है कि नियमों को सख्त बनाने के साथ-साथ गरीब और ग्रामीण परिवारों की परिस्थितियों को भी ध्यान में रखा जाना चाहिए। उनका कहना है कि पैन कार्ड को अनिवार्य करने से कई पात्र परिवार इस योजना के लाभ से वंचित हो सकते हैं।
इधर अभिभावकों ने सरकार से मांग की है कि आवेदन प्रक्रिया को सरल बनाया जाए और जिन परिवारों के पास पैन कार्ड नहीं है, उन्हें वैकल्पिक दस्तावेजों के आधार पर आवेदन की अनुमति दी जाए। विशेषज्ञों का भी मानना है कि आरटीई का मूल उद्देश्य गरीब बच्चों को शिक्षा का अवसर देना है, इसलिए नियमों को लागू करते समय संतुलन बनाए रखना जरूरी है।
अब देखना होगा कि बढ़ते विवाद के बीच शिक्षा विभाग इन नियमों में कोई बदलाव करता है या नहीं। फिलहाल इस मुद्दे ने राज्यभर में आरटीई प्रवेश प्रक्रिया को लेकर नई बहस छेड़ दी है।