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'स्कूल का रास्ता खुलवाओ या कलेक्ट्रेट में पढ़ाएंगे', वीडियो में देंखे दौसा में बच्चों का अनोखा विरोध; बस्ता लेकर कलेक्टर कार्यालय पहुंचे छात्र

 

राजस्थान के दौसा जिले में सरकारी स्कूल तक जाने का रास्ता अतिक्रमण से बंद होने पर छात्रों ने अनोखे अंदाज में विरोध दर्ज कराया। स्कूल यूनिफॉर्म पहनकर और बस्ता लेकर दर्जनों बच्चे सीधे कलेक्ट्रेट पहुंच गए। बच्चों का कहना था कि जब स्कूल तक सुरक्षित पहुंचने का रास्ता ही नहीं है तो अब वे कलेक्ट्रेट में ही पढ़ाई करेंगे। यह मामला दौसा के सिकराय उपखंड क्षेत्र के पीलवा खुर्द गांव की चैना वाली ढाणी स्थित राजकीय उच्च प्राथमिक विद्यालय का है, जहांस्कूल जाने वाले रास्ते पर कथित अतिक्रमण के कारण विद्यार्थियों और ग्रामीणों को लंबे समय से परेशानी का सामना करना पड़ रहा है।

"अधिकारी आते हैं, वीडियो बनाते हैं और चले जाते हैं"

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कलेक्ट्रेट पहुंचे बच्चों ने प्रशासन के सामने अपनी पीड़ा बयां करते हुए कहा कि कई बार अधिकारियों को शिकायत की गई, लेकिन समस्या का समाधान नहीं हुआ।बच्चों ने कहा, "अधिकारी आते हैं, वीडियो बनाते हैं और फिर चले जाते हैं। रास्ते पर कब्जा करने वालों ने कंटीले तार लगा दिए हैं। स्कूल आते-जाते समय हमें कई बार चोट लग जाती है। अब विरोध करने की बजाय हम यहीं कलेक्ट्रेट में पढ़ने आ गए हैं।"छात्रों की यह बात सुनकर वहां मौजूद अधिकारी और अन्य लोग भी भावुक हो गए।

दिव्यांग अभिभावक की छलकी पीड़ा

बच्चों के साथ आए दिव्यांग अभिभावक सुरेंद्र सैनी अपनी बात कहते-कहते भावुक हो गए। उन्होंने रोते हुए कहा कि ग्रामीण कई बार प्रशासन से रास्ता खुलवाने की गुहार लगा चुके हैं, लेकिन अब तक कोई कार्रवाई नहीं हुई।उन्होंने कहा, "हम परेशान हैं, हमारे बच्चे परेशान हैं। इस बार वापस नहीं जाएंगे, जरूरत पड़ी तो यहीं मर जाएंगे।" उनकी यह बात सुनकर मौके पर मौजूद लोगों का भी दिल पसीज गया।

कलेक्टर ने दिया कार्रवाई का भरोसा

मामले की गंभीरता को देखते हुए जिला कलेक्टर सौम्या झा ने स्वयं बच्चों और ग्रामीणों से मुलाकात की। उन्होंने पूरी बात सुनी और भरोसा दिलाया कि रास्ते से अतिक्रमण हटाने के लिए नियमानुसार सख्त कार्रवाई की जाएगी।कलेक्टर ने अधिकारियों को मामले की जांच कर शीघ्र समाधान सुनिश्चित करने के निर्देश भी दिए।

लंबे समय से बनी हुई है समस्या

ग्रामीणों के अनुसार, स्कूल तक जाने वाले रास्ते पर काफी समय से अतिक्रमण है। रास्ते में लगाए गए कंटीले तार बच्चों के लिए खतरा बने हुए हैं। कई छात्र स्कूल आते-जाते समय घायल भी हो चुके हैं।ग्रामीणों का कहना है कि शिक्षा का अधिकार तभी सार्थक होगा, जब बच्चों को स्कूल तक सुरक्षित पहुंचने का रास्ता उपलब्ध कराया जाएगा।बच्चों का यह अनोखा विरोध अब पूरे जिले में चर्चा का विषय बना हुआ है। प्रशासन ने जल्द कार्रवाई का भरोसा दिया है, जबकि ग्रामीणों का कहना है कि वे अब केव आश्वासन नहीं, बल्कि जमीन पर समाधान चाहते हैं।