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विश्व स्वास्थ्य दिवस पर सीमावर्ती जैसलमेर की स्वास्थ्य व्यवस्था की खुली पोल, जमीनी हालात चिंताजनक

 

प्रतिवर्ष 7 अप्रैल को मनाए जाने वाले विश्व स्वास्थ्य दिवस के अवसर पर जहां पूरे देश में बेहतर स्वास्थ्य सेवाओं और जनस्वास्थ्य सुधार का संकल्प दोहराया जाता है, वहीं राजस्थान के सीमावर्ती जिले Jaisalmer की चिकित्सा एवं स्वास्थ्य व्यवस्था की जमीनी हकीकत एक अलग ही तस्वीर पेश करती है।

मरुस्थलीय और दूरस्थ क्षेत्र होने के कारण जैसलमेर में स्वास्थ्य सेवाओं की पहुंच पहले से ही चुनौतीपूर्ण मानी जाती है, लेकिन ग्रामीण और सीमावर्ती इलाकों में हालात और भी अधिक गंभीर बने हुए हैं। कई गांवों में प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्रों की कमी, डॉक्टरों की अनुपलब्धता और आवश्यक चिकित्सा सुविधाओं का अभाव लोगों के लिए बड़ी परेशानी का कारण बना हुआ है।

स्थानीय लोगों का कहना है कि आपातकालीन स्थिति में मरीजों को जिला मुख्यालय या बड़े शहरों तक ले जाना पड़ता है, जिसमें समय और दूरी दोनों ही बड़ी बाधा बनते हैं। कई बार इलाज में देरी के कारण मरीजों की हालत गंभीर हो जाती है। खासकर गर्भवती महिलाओं, बच्चों और बुजुर्गों को स्वास्थ्य सुविधाओं की कमी का सबसे अधिक सामना करना पड़ता है।

स्वास्थ्य विभाग के अधिकारियों के अनुसार, दूरदराज के क्षेत्रों में सेवाएं पहुंचाने के लिए प्रयास किए जा रहे हैं, लेकिन भौगोलिक परिस्थितियां और संसाधनों की कमी बड़ी चुनौती बनी हुई है। मोबाइल मेडिकल यूनिट और स्वास्थ्य शिविरों के माध्यम से कुछ राहत देने की कोशिश की जा रही है, लेकिन यह स्थायी समाधान नहीं माना जा रहा।

गांवों में रहने वाले लोगों ने बताया कि कई स्वास्थ्य केंद्रों में दवाइयों की कमी और स्टाफ की अनुपस्थिति आम समस्या है। इसके चलते मरीजों को निजी अस्पतालों पर निर्भर होना पड़ता है, जो आर्थिक रूप से भी भारी बोझ साबित होता है।

विशेषज्ञों का मानना है कि सीमावर्ती जिलों में स्वास्थ्य ढांचे को मजबूत करना बेहद जरूरी है, क्योंकि यह न केवल सामान्य स्वास्थ्य से जुड़ा मुद्दा है, बल्कि राष्ट्रीय सुरक्षा और आपातकालीन स्थिति से भी जुड़ा हुआ विषय है।

विश्व स्वास्थ्य दिवस के मौके पर इस तरह की स्थिति एक गंभीर संदेश देती है कि केवल योजनाओं की घोषणा ही पर्याप्त नहीं है, बल्कि उन्हें जमीनी स्तर पर प्रभावी ढंग से लागू करना आवश्यक है।

स्थानीय नागरिकों और सामाजिक संगठनों ने सरकार से मांग की है कि जैसलमेर जैसे दूरस्थ जिलों में स्वास्थ्य सुविधाओं को प्राथमिकता दी जाए, ताकि हर नागरिक को समय पर और बेहतर इलाज मिल सके।

फिलहाल यह स्थिति इस बात की ओर इशारा करती है कि स्वास्थ्य सेवाओं के विस्तार के बिना “स्वस्थ भारत” का लक्ष्य अधूरा रहेगा।