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सावन के पहले सोमवार पर शिवालयों में उमड़ा आस्था का सैलाब, वीडियो में जाने राजस्थान के मंदिरों में जलाभिषेक के लिए लंबी कतारें

 

सावन के पहले सोमवार पर राजस्थान के शिवालयों में श्रद्धा और भक्ति का अद्भुत नजारा देखने को मिला। सुबह मंगला आरती के साथ मंदिरों के पट खुलते ही भगवान शिव के जलाभिषेक का सिलसिला शुरू हो गया। प्रदेशभर के प्रमुख शिव मंदिरों में तड़के से ही श्रद्धालुओं की भारी भीड़ उमड़ पड़ी। शिवभक्त "हर-हर महादेव" और "बम-बम भोले" के जयघोष के साथ पूजा-अर्चना करते नजर आए। राजधानी जयपुर में बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं ने गलताजी से पवित्र जल भरकर विभिन्न शिवालयों की ओर कूच किया। शहर के प्रसिद्ध झारखंड महादेव मंदिर के बाहर करीब 2 किलोमीटर लंबी कतार लगी रही। श्रद्धालु घंटों अपनी बारी का इंतजार करते हुए भगवान शिव का जलाभिषेक करने पहुंचे।

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वहीं, ताड़केश्वर महादेव मंदिर में भी सुबह से भक्तों का तांता लगा रहा। यहां सुबह 4 बजे उज्जैन के महाकाल मंदिर की तर्ज पर भस्म आरती का आयोजन किया गया। मंदिर के पुजारी शक्ति व्यास ने बताया कि मंदिर के पट सुबह 3:45 बजे खोल दिए गए थे। इसके बाद सुबह 4:30 बजे भगवान शिव का विशेष अभिषेक किया गया।उन्होंने बताया कि अभिषेक के दौरान 51 किलो देसी गाय के घी, 151 किलो दूध, दही, शहद और शक्कर से भगवान भोलेनाथ का रुद्राभिषेक किया गया। मंगला आरती के समय भगवान शिव का दूल्हे स्वरूप में विशेष श्रृंगार किया गया, जिसे देखने के लिए बड़ी संख्या में श्रद्धालु मंदिर पहुंचे।

दौसा के प्रसिद्ध नीलकंठ महादेव मंदिर में भी श्रद्धालुओं का उत्साह देखते ही बन रहा था। भक्तों ने करीब 350 सीढ़ियां चढ़कर मंदिर पहुंचकर भगवान शिव का जलाभिषेक किया और सुख-समृद्धि की कामना की।इसी तरह जालोर के प्रसिद्ध सिरे मंदिर में भी शिवभक्तों की भारी भीड़ रही। श्रद्धालुओं ने करीब एक हजार सीढ़ियां चढ़कर मंदिर पहुंचकर भगवान भोलेनाथ का जलाभिषेक किया। कठिन चढ़ाई के बावजूद भक्तों के उत्साह में कोई कमी नहीं दिखी।

सावन के पहले सोमवार को देखते हुए मंदिरों में सुरक्षा और व्यवस्थाओं के विशेष इंतजाम किए गए। कई स्थानों पर पुलिस और स्वयंसेवकों की तैनाती की गई, ताकि श्रद्धालुओं को दर्शन और जलाभिषेक में किसी तरह की परेशानी न हो।मान्यता है कि सावन के महीने में भगवान शिव की विधि-विधान से पूजा और जलाभिषेक करने से मनोकामनाएं पूर्ण होती हैं तथा जीवन में सुख, शांति और समृद्धि का वास होता है। इसी आस्था के चलते प्रदेशभर के शिवालयों में सुबह से ही श्रद्धालुओं का जनसैलाब उमड़ पड़ा।