23 अगस्त को जंतर-मंतर पर आरक्षण नीति के खिलाफ महाआंदोलन, वीडियो में देंखे श्री राष्ट्रीय राजपूत करणी सेना भी होगी शामिल
दिल्ली के जंतर-मंतर पर 23 अगस्त को प्रस्तावित यूजीसी आरक्षण नीति के खिलाफ महाआंदोलन में श्री राष्ट्रीय राजपूत करणी सेना भी शामिल होगी। संगठन के राजस्थान प्रदेश अध्यक्ष उजागर सिंह डाबला ने कहा कि आंदोलन में देश के 22 राज्यों से समाज के लोग दिल्ली पहुंचेंगे। उन्होंने दावा किया कि बड़ी संख्या में कार्यकर्ता और समर्थक आंदोलन में शामिल होकर आरक्षण नीति के खिलाफ अपनी आवाज उठाएंगे। उजागर सिंह डाबला के मुताबिक, सुखदेव सिंह गोगामेड़ी की ओर से तैयार की गई ‘22 राज्यों की सेना’ भी इस आंदोलन का हिस्सा बनेगी। उन्होंने बताया कि संगठन के सभी प्रदेश अध्यक्षों को अपने-अपने राज्यों से अधिक से अधिक लोगों के साथ दिल्ली पहुंचने के निर्देश दिए गए हैं।
यूजीसी आरक्षण नीति को रोलबैक करने की मांग
डाबला ने कहा कि संगठन की पहली मांग केंद्र सरकार से यूजीसी की आरक्षण नीति को पूरी तरह वापस लेने की है। उन्होंने कहा कि संगठन योग्यता आधारित आरक्षण के खिलाफ नहीं है, लेकिन आरक्षण का लाभ वास्तविक रूप से आर्थिक रूप से कमजोर परिवारों तक पहुंचना चाहिए।उन्होंने कहा कि आरक्षण व्यवस्था में ऐसे परिवारों को प्राथमिकता मिलनी चाहिए जो वास्तव में आर्थिक रूप से कमजोर हैं। संगठन का कहना है कि सामाजिक और आर्थिक रूप से पिछड़े वर्गों के हितों को ध्यान में रखते हुए आरक्षण नीति की समीक्षा की जानी चाहिए।
पंचायत चुनाव में EWS आरक्षण की मांग
श्री राष्ट्रीय राजपूत करणी सेना ने राजस्थान सरकार से आगामी पंचायती राज चुनाव में EWS यानी आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग के लिए आरक्षण देने की मांग भी की है। उजागर सिंह डाबला ने कहा कि यदि सरकार उनकी इस मांग को पूरा नहीं करती है तो समाज आगामी चुनावों में वोट के माध्यम से अपना विरोध दर्ज कराएगा।डाबला ने कहा कि यह आंदोलन केवल एक संगठन तक सीमित नहीं है, बल्कि बड़ी संख्या में युवा और समाज के लोग इसमें शामिल होंगे। उन्होंने युवाओं से 23 अगस्त को दिल्ली के जंतर-मंतर पर भारी संख्या में पहुंचने की अपील की।
22 राज्यों से पहुंचने का दावा
संगठन की ओर से दावा किया गया है कि 23 अगस्त के आंदोलन में 22 राज्यों के प्रतिनिधि और कार्यकर्ता शामिल होंगे। प्रदेश अध्यक्षों को अपने-अपने राज्यों से संगठन की ताकत के साथ दिल्ली पहुंचने के निर्देश दिए गए हैं।आंदोलन के दौरान यूजीसी आरक्षण नीति को वापस लेने और आर्थिक रूप से कमजोर वर्गों को लेकर संगठन की मांगों को प्रमुखता से उठाया जाएगा। साथ ही राजस्थान में आगामी पंचायती राज चुनाव में EWS आरक्षण लागू करने की मांग भी सरकार के सामने रखी जाएगी।अब 23 अगस्त को होने वाले इस महाआंदोलन पर राजनीतिक और सामाजिक संगठनों की नजर रहेगी। आंदोलन में कितनी संख्या में लोग पहुंचते हैं और केंद्र तथा राजस्थान सरकार की ओर से इन मांगों पर क्या प्रतिक्रिया आती है, यह आने वाले दिनों में स्पष्ट होगा।