×

ओएमआर शीट गड़बड़ी मामलाख, वीडियो में देखें अशोक गहलोत का सीएम भजनलाल शर्मा पर तीखा हमला, जांच एजेंसियों पर दबाव का आरोप

 

राजस्थान में ओएमआर शीट गड़बड़ी को लेकर सियासत तेज हो गई है। पूर्व मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा के हालिया बयान पर कड़ा पलटवार करते हुए जांच एजेंसियों पर दबाव बनाने का गंभीर आरोप लगाया है। गहलोत ने कहा है कि राज्य सरकार ओएमआर शीट गड़बड़ी की जांच को सिर्फ 2023 तक सीमित रखने की कोशिश कर रही है, ताकि बाद की भर्तियों को जांच के दायरे से बाहर रखा जा सके।

<a style="border: 0px; overflow: hidden" href=https://youtube.com/embed/EbjQ14PXFK4?autoplay=1&mute=1><img src=https://img.youtube.com/vi/EbjQ14PXFK4/hqdefault.jpg alt=""><span><div class="youtube_play"></div></span></a>" style="border: 0px; overflow: hidden;" width="640">

अशोक गहलोत ने यह आरोप सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘एक्स’ पर एक पोस्ट के जरिए लगाए। उन्होंने दावा किया कि मुख्यमंत्री और मौजूदा सरकार जांच एजेंसियों पर 2025-26 की भर्तियों की जांच नहीं करने का दबाव बना रही है। गहलोत के मुताबिक, अगर गड़बड़ी हुई है तो उसकी निष्पक्ष और व्यापक जांच होनी चाहिए, न कि राजनीतिक सुविधा के अनुसार समय-सीमा तय की जाए।

गहलोत ने मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा के उस बयान को भी आड़े हाथों लिया, जिसमें उन्होंने कहा था कि राजस्थान कर्मचारी चयन बोर्ड (RSSB) में पकड़े गए आरोपियों ने केवल कांग्रेस शासनकाल में ही गड़बड़ियां की थीं। गहलोत ने इस बयान को “हास्यास्पद और जांच को भटकाने वाला” करार दिया।

पूर्व सीएम ने तर्क देते हुए लिखा कि यह सामान्य समझ की बात है कि अगर कोई व्यक्ति 2019 में ओएमआर शीट बदलने जैसा गंभीर अपराध कर रहा था और वह 2026 तक उसी पद पर बना रहा, तो क्या यह संभव है कि उसने भाजपा सरकार के कार्यकाल (2024-25) में अचानक अपराध करना बंद कर दिया हो। उन्होंने सवाल उठाया कि क्या गड़बड़ी करने वाले लोग सत्ता परिवर्तन के साथ अपने कृत्य बदल लेते हैं।

गहलोत ने कहा कि इस तरह के बयान देकर सरकार जांच की दिशा को प्रभावित करने की कोशिश कर रही है। उनका आरोप है कि सरकार चाहती है कि जांच सिर्फ कांग्रेस शासन तक सीमित रहे, ताकि मौजूदा कार्यकाल में हुई संभावित गड़बड़ियों पर पर्दा डाला जा सके। उन्होंने कहा कि भर्ती परीक्षाओं से जुड़े मामलों में लाखों युवाओं का भविष्य जुड़ा हुआ है और इस तरह की राजनीति से युवाओं का भरोसा टूटता है।

पूर्व मुख्यमंत्री ने यह भी कहा कि अगर सरकार सच में पारदर्शिता चाहती है, तो उसे जांच एजेंसियों को पूरी आजादी देनी चाहिए और सभी वर्षों की भर्तियों की निष्पक्ष जांच करानी चाहिए। गहलोत ने दो टूक कहा कि दोषी चाहे किसी भी सरकार के समय का हो, उसके खिलाफ सख्त कार्रवाई होनी चाहिए।

इस बयान के बाद राजस्थान की राजनीति में हलचल और तेज हो गई है। कांग्रेस जहां सरकार पर जांच से बचने का आरोप लगा रही है, वहीं भाजपा कांग्रेस शासनकाल की भर्तियों में गड़बड़ियों को लेकर लगातार हमलावर है। ओएमआर शीट गड़बड़ी का मामला पहले ही युवाओं और अभ्यर्थियों के बीच आक्रोश का कारण बना हुआ है।

अब देखना होगा कि सरकार इस आरोप पर क्या प्रतिक्रिया देती है और जांच एजेंसियां किस दायरे में जांच को आगे बढ़ाती हैं। लेकिन इतना साफ है कि ओएमआर शीट गड़बड़ी का मुद्दा आने वाले दिनों में राजस्थान की राजनीति का बड़ा मुद्दा बना रहेगा।