×

अब न फ्लोराइड का डर, न दूर से पानी लाने की परेशानी; कोटा गणेशपुरा में पहुंचेगा चंबल का पानी

 

राजस्थान के जैसलमेर जिले के पोकरण में आयोजित रात्रि चौपाल के बाद एक बार फिर ओरण भूमि का मुद्दा सुर्खियों में आ गया है। स्थानीय लोगों ने चौपाल के दौरान ओरण क्षेत्र से जुड़े अधिकारों और संरक्षण को लेकर अपनी चिंताएं खुलकर सामने रखीं। ग्रामीणों की मांगों और शिकायतों को सुनने के बाद मामला फिर से चर्चा में आ गया है।

इस कार्यक्रम में केंद्रीय जल शक्ति मंत्री गजेंद्र सिंह शेखावत भी मौजूद रहे, जहां उन्होंने ग्रामीणों की समस्याओं को गंभीरता से सुना। ओरण भूमि से जुड़े मुद्दे पर ग्रामीणों ने कहा कि यह पारंपरिक और धार्मिक रूप से महत्वपूर्ण भूमि है, लेकिन इसके संरक्षण और उपयोग को लेकर लगातार भ्रम की स्थिति बनी हुई है।

ग्रामीणों की बात सुनने के बाद गजेंद्र सिंह शेखावत ने भरोसा दिलाया कि वे इस मुद्दे को राज्य सरकार के समक्ष उठाएंगे। उन्होंने कहा कि वे इस संबंध में मुख्यमंत्री और राजस्व मंत्री से बातचीत करेंगे ताकि ओरण भूमि से जुड़े मामलों का स्थायी और स्पष्ट समाधान निकाला जा सके।

चौपाल में बड़ी संख्या में ग्रामीण मौजूद थे, जिन्होंने जल संकट, भूमि अधिकार और विकास कार्यों से जुड़ी अन्य समस्याएं भी उठाईं। अधिकारियों ने मौके पर कई मामलों का समाधान करने का प्रयास किया और बाकी मामलों पर कार्रवाई का आश्वासन दिया।

ओरण भूमि को लेकर यह मुद्दा लंबे समय से पश्चिमी राजस्थान में चर्चा का विषय बना हुआ है। यह भूमि पारंपरिक रूप से स्थानीय समुदायों द्वारा धार्मिक और सामाजिक रूप से संरक्षित मानी जाती है। लेकिन विकास परियोजनाओं और प्रशासनिक प्रक्रियाओं के चलते कई बार इसे लेकर विवाद की स्थिति बनती रही है।

गजेंद्र सिंह शेखावत ने कहा कि सरकार का उद्देश्य विकास और परंपरा दोनों के बीच संतुलन बनाए रखना है। उन्होंने आश्वासन दिया कि किसी भी समुदाय की भावनाओं को ठेस पहुंचाए बिना समाधान निकाला जाएगा।

इस चौपाल के बाद स्थानीय लोगों में उम्मीद जगी है कि ओरण भूमि से जुड़े मुद्दों पर सरकार कोई स्पष्ट नीति बनाएगी। ग्रामीणों का कहना है कि लंबे समय से इस विषय पर समाधान की प्रतीक्षा की जा रही है।

फिलहाल यह मुद्दा फिर से प्रशासनिक और राजनीतिक स्तर पर चर्चा में आ गया है और आने वाले दिनों में इस पर उच्च स्तर पर बातचीत होने की संभावना जताई जा रही है।