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विदेश से एमबीबीएस कर लौटे छात्रों के लिए नई मुश्किल, वीडियो में देंखे NMC ने दोबारा ऑफलाइन क्लास लेने का दिया आदेश

 

विदेश से एमबीबीएस की पढ़ाई पूरी कर भारत लौटे हजारों छात्रों के सामने नई परेशानी खड़ी हो गई है। National Medical Commission (एनएमसी) ने विदेशी मेडिकल ग्रेजुएट्स को कोरोना काल में ऑनलाइन की गई पढ़ाई को दोबारा ऑफलाइन माध्यम से पूरा करने का निर्देश दिया है। यदि छात्र ऐसा नहीं करते हैं तो State Medical Councils India उन्हें स्थायी पंजीकरण (परमानेंट रजिस्ट्रेशन) देने से इनकार कर सकती हैं।

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एनएमसी के इस आदेश के अनुसार कोरोना महामारी के दौरान जिन छात्रों ने ऑनलाइन माध्यम से मेडिकल की पढ़ाई की थी, उन्हें अब फिजिकल ऑनसाइट क्लास और क्लिनिकल ट्रेनिंग पूरी करनी होगी। इसके बिना उन्हें भारत में डॉक्टर के रूप में प्रैक्टिस करने की अनुमति नहीं मिलेगी।

यह आदेश एनएमसी के सचिव Dr. Raghav Langer की ओर से सभी राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों को भेजा गया है। इसमें संबंधित राज्य मेडिकल काउंसिलों के रजिस्ट्रार को निर्देश दिया गया है कि वे इस नियम का पालन सुनिश्चित करें। जानकारी के मुताबिक यह आदेश 6 मार्च 2025 को जारी किया गया था।

एनएमसी के इस फैसले के बाद विदेश से मेडिकल की पढ़ाई कर लौटे छात्रों में चिंता बढ़ गई है। कई छात्रों का कहना है कि उन्होंने कोरोना महामारी के दौरान मजबूरी में ऑनलाइन माध्यम से पढ़ाई की थी, क्योंकि उस समय दुनिया भर में लॉकडाउन और यात्रा प्रतिबंध लागू थे। अब दोबारा ऑफलाइन क्लास और क्लिनिकल ट्रेनिंग लेने का निर्देश उनके लिए समय और आर्थिक दोनों रूप से बड़ी चुनौती बन गया है।

इस मुद्दे को लेकर सोमवार को बड़ी संख्या में विदेशी मेडिकल ग्रेजुएट्स Delhi में एनएमसी मुख्यालय के बाहर एकत्र होने की तैयारी कर रहे हैं। छात्र एनएमसी अधिकारियों से मुलाकात कर इस नियम में राहत या छूट देने की मांग करेंगे। उनका कहना है कि महामारी जैसी असाधारण परिस्थितियों में हुई पढ़ाई को देखते हुए सरकार और एनएमसी को मानवीय दृष्टिकोण अपनाना चाहिए।

विदेश से मेडिकल की पढ़ाई कर लौटे इन छात्रों को आमतौर पर Foreign Medical Graduate Examination (एफएमजीई) पास करने के बाद भारत में इंटर्नशिप और रजिस्ट्रेशन की प्रक्रिया से गुजरना पड़ता है। लेकिन नए आदेश के बाद उनकी प्रक्रिया और लंबी हो सकती है।

छात्रों का कहना है कि अगर एनएमसी के निर्देशों को सख्ती से लागू किया गया तो हजारों मेडिकल ग्रेजुएट्स का करियर प्रभावित हो सकता है। फिलहाल छात्र संगठन और प्रभावित विद्यार्थी एनएमसी से इस मामले में पुनर्विचार की मांग कर रहे हैं। आने वाले दिनों में इस मुद्दे पर एनएमसी की प्रतिक्रिया के बाद स्थिति और स्पष्ट हो सकती है। 🏥📚