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'न धर्म, न मजहब... सबसे ऊपर इंसानियत और मां', जयपुर में बोले सनी देओल; 'वीडियो में जाने गदर' को लेकर भी कही बड़ी बात

 

बॉलीवुड अभिनेता सनी देओल ने कहा कि उनकी फिल्मों का उद्देश्य कभी भी लोगों को धर्म या मजहब के आधार पर बांटना नहीं रहा। उन्होंने कहा कि उनकी आगामी फिल्म 'बंटवारा 1947' भी किसी धर्म विशेष की कहानी नहीं, बल्कि इंसानियत, रिश्तों और मानवीय संवेदनाओं को दर्शाने वाली फिल्म है। सनी देओल बुधवार को जयपुर में अपने बेटे करण देओल और फिल्म निर्देशक राजकुमार संतोषी के साथ फिल्म के प्रमोशन के लिए पहुंचे थे।

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मीडिया से बातचीत में सनी देओल ने कहा कि फिल्म में उनका किरदार किसी धर्म का प्रतिनिधि नहीं, बल्कि इंसानियत का चेहरा है। उन्होंने कहा, "फिल्म में दिखाया गया है कि हालात इंसान को तोड़ देते हैं, लेकिन आखिर में जीत हमेशा इंसानियत की होती है। अंत में न कोई धर्म बचता है, न कोई मजहब... सबसे बड़ी चीज इंसानियत है और उससे भी बड़ी हमारी मां होती है।"

'हर चीज को धर्म और राजनीति से जोड़ना ठीक नहीं'

सनी देओल ने कहा कि आज के दौर में समाज में लगभग हर मुद्दे को धर्म और राजनीति के नजरिए से देखा जाने लगा है, लेकिन उन्होंने हमेशा खुद को इन विवादों से दूर रखा है।उन्होंने कहा, "मैं कभी ऐसी फिल्में नहीं करता जो लोगों को बांटने का काम करें। कई बार लोग फिल्मों को अलग नजरिए से देखने लगते हैं, जबकि फिल्म का उद्देश्य बिल्कुल अलग होता है।"

'गदर' प्रेम और परिवार की कहानी थी

अपनी सुपरहिट फिल्म गदर: एक प्रेम कथा का जिक्र करते हुए सनी देओल ने कहा कि उन्होंने इसे कभी हिंदू-मुस्लिम फिल्म के रूप में नहीं देखा।उन्होंने कहा, "'गदर' मेरे लिए कभी हिंदू-मुस्लिम फिल्म नहीं थी। वह एक परिवार, एक प्रेम कहानी और इंसानी रिश्तों की कहानी थी। दर्शकों ने भी उसे उसी भावना के साथ अपनाया।"

जयपुर में फिल्म का प्रमोशन

सनी देओल अपनी आगामी फिल्म 'बंटवारा 1947' के प्रचार के लिए जयपुर पहुंचे थे। उनके साथ अभिनेता करण देओल और निर्देशक राजकुमार संतोषी भी मौजूद रहे। कार्यक्रम के दौरान तीनों ने फिल्म की कहानी, निर्माण और उससे जुड़े अनुभव साझा किए। सनी देओल ने कहा कि यह फिल्म इतिहास की पृष्ठभूमि पर आधारित जरूर है, लेकिन इसका मूल संदेश इंसानियत, प्रेम और एकता है। उन्होंने उम्मीद जताई कि दर्शक फिल्म को उसके वास्तविक संदेश के साथ देखेंगे और सराहेंगे।