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फ्री इलाज योजना में 50% से अधिक क्लेम रिजेक्ट, सरकार ने योजना प्रभारियों को थमाए नोटिस

 

राजस्थान की मुख्यमंत्री आयुष्मान आरोग्य योजना में गंभीर खामियां सामने आई हैं। सरकारी आंकड़ों के अनुसार, पिछले चार महीनों में इस योजना के तहत 48 करोड़ रुपये से अधिक के इलाज के क्लेम रिजेक्ट कर दिए गए हैं। इससे योजना का लाभ लेने वाले मरीजों और उनके परिजनों में गहरा असंतोष और चिंता पैदा हो गई है।

सरकारी अस्पतालों की लापरवाही और सिस्टम की कमजोरियों के चलते क्लेम रिजेक्शन दर 48.38 प्रतिशत तक पहुंच गई है। इसका मतलब यह हुआ कि योजना के आधे से अधिक लाभार्थियों को उनके स्वास्थ्य खर्च की भरपाई नहीं मिल पाई। इस मामले की गंभीरता को देखते हुए चिकित्सा शिक्षा विभाग ने प्रदेश के 28 सरकारी अस्पतालों को अधिकृत नोटिस जारी किया है।

नोटिस में तीन दिन के भीतर संतोषजनक जवाब देने का निर्देश दिया गया है। विभाग ने चेतावनी दी है कि यदि जवाब संतोषजनक नहीं पाया गया, तो राजस्थान सेवा नियम-1958 के तहत संबंधित अधिकारियों और योजना प्रभारियों के खिलाफ अनुशासनात्मक कार्रवाई की जाएगी।

विशेषज्ञों का कहना है कि योजना के क्लेम रिजेक्ट होने के पीछे कई कारण हो सकते हैं। इनमें कागजी कार्यवाही में चूक, दस्तावेजों का सही न होना, अस्पतालों में प्रणालीगत लापरवाही और ऑनलाइन पोर्टल पर अपडेट में देरी प्रमुख हैं। विशेषज्ञों ने सुझाव दिया कि क्लेम प्रक्रिया को सरल, पारदर्शी और समयबद्ध बनाने की आवश्यकता है, ताकि योजना का असली लाभ मरीजों तक पहुंच सके।

इस घटना ने यह भी उजागर किया कि सरकारी अस्पतालों में प्रशासनिक निगरानी पर्याप्त नहीं है। मरीज और उनके परिजन अक्सर क्लेम रिजेक्ट होने के कारण वित्तीय और मानसिक तनाव झेलते हैं। अधिकारियों का कहना है कि अब इस मामले में तत्काल सुधारात्मक कदम उठाए जाएंगे।

सामाजिक और स्वास्थ्य अधिकारों के जानकारों का कहना है कि फ्री इलाज योजना जैसी बड़ी स्वास्थ्य योजनाओं का उद्देश्य गरीब और जरूरतमंद मरीजों को आर्थिक राहत देना है। यदि आधे से अधिक क्लेम रिजेक्ट हो रहे हैं, तो योजना का मूल उद्देश्य प्रभावित हो रहा है। उन्होंने सरकार से अपील की है कि निष्पक्ष जांच के साथ प्रक्रिया में सुधार किया जाए और मरीजों को उचित राहत सुनिश्चित की जाए।

प्रदेश के अस्पतालों में अब संपूर्ण क्लेम प्रक्रिया की समीक्षा की जाएगी। विभागीय अधिकारियों ने कहा कि सुधारात्मक उपायों में कर्मियों को प्रशिक्षण देना, ऑनलाइन पोर्टल को अपडेट करना और क्लेम अनुमोदन प्रक्रिया को तेज करना शामिल होगा।

कुल मिलाकर, राजस्थान की मुख्यमंत्री आयुष्मान आरोग्य योजना में 50 प्रतिशत से अधिक क्लेम रिजेक्शन ने सरकारी स्वास्थ्य प्रणाली की कमियों को उजागर किया है। विभाग द्वारा नोटिस जारी करना और संतोषजनक जवाब न मिलने पर अनुशासनात्मक कार्रवाई की चेतावनी मरीजों और अधिकारियों दोनों के लिए एक सतर्कता संदेश के रूप में देखा जा रहा है। योजना में सुधार और पारदर्शिता सुनिश्चित करना अब सबसे बड़ा चुनौतीपूर्ण कदम बन गया है।