मध्य पूर्व तनाव का असर राजस्थान पर, निर्माण और सड़क परियोजनाओं की रफ्तार धीमी
मध्य पूर्व में लगातार बढ़ते तनाव और संभावित युद्ध जैसे हालात अब भारत के राज्यों की अर्थव्यवस्था को भी प्रभावित करने लगे हैं। अमेरिका, इजरायल और ईरान के बीच बढ़ते भू-राजनीतिक तनाव का असर अब राजस्थान में साफ दिखाई देने लगा है, जहां विकास कार्यों की रफ्तार पर असर पड़ा है।
राजस्थान में निर्माण सेक्टर और सड़क परियोजनाओं पर इसका सीधा प्रभाव देखने को मिल रहा है। कच्चे माल की कीमतों में अचानक आए उछाल ने सरकारी ठेकेदारों और चल रहे प्रोजेक्ट्स की लागत गणना को पूरी तरह प्रभावित कर दिया है। इससे कई निर्माणाधीन परियोजनाओं के बजट पर दबाव बढ़ गया है।
विशेषज्ञों के अनुसार, अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल और निर्माण सामग्री की कीमतों में उतार-चढ़ाव का सीधा असर स्थानीय स्तर पर भी दिखाई देता है। मध्य पूर्व क्षेत्र वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति का एक प्रमुख केंद्र है, ऐसे में वहां तनाव बढ़ने पर आपूर्ति श्रृंखला प्रभावित होती है, जिसका असर भारत जैसे देशों की अर्थव्यवस्था पर भी पड़ता है।
राजस्थान में सड़क निर्माण, पुलों और अन्य बुनियादी ढांचा परियोजनाओं पर काम कर रहे ठेकेदारों का कहना है कि पिछले कुछ समय में डीजल, बिटुमिन और अन्य निर्माण सामग्री की कीमतों में तेजी से बढ़ोतरी हुई है। इससे परियोजनाओं की लागत बढ़ गई है और कई जगह काम की गति धीमी करनी पड़ी है।
सरकारी अधिकारियों के अनुसार, स्थिति पर नजर रखी जा रही है और आवश्यकतानुसार योजनाओं की समीक्षा की जा सकती है। हालांकि फिलहाल किसी बड़े प्रोजेक्ट को रोकने की आधिकारिक घोषणा नहीं की गई है, लेकिन लागत बढ़ने के कारण वित्तीय दबाव स्पष्ट रूप से महसूस किया जा रहा है।
आर्थिक विशेषज्ञों का मानना है कि यदि वैश्विक तनाव लंबे समय तक बना रहता है, तो इसका असर न केवल निर्माण क्षेत्र पर बल्कि अन्य विकास परियोजनाओं और निवेश पर भी पड़ सकता है।
फिलहाल, राजस्थान का विकास मॉडल इस अंतरराष्ट्रीय अस्थिरता की चपेट में आता दिख रहा है, जिससे आने वाले समय में परियोजनाओं की गति और लागत दोनों पर असर पड़ने की आशंका जताई जा रही है।