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नगर निगम में मेयर की दौड़ तेज, भाजपा के विजेता पार्षदों ने शुरू की लॉबिंग

 

नगर निगम चुनाव में भारतीय जनता पार्टी ने 80 में से 53 वार्डों पर जीत दर्ज कर स्पष्ट बहुमत हासिल कर लिया है। चुनाव परिणाम आने के बाद अब शहर के प्रथम नागरिक यानी मेयर और डिप्टी मेयर के चुनाव को लेकर राजनीतिक गतिविधियां तेज हो गई हैं। भाजपा के विजयी पार्षदों में से कई दावेदारों ने मेयर की कुर्सी के लिए अपनी कोशिशें शुरू कर दी हैं और शीर्ष नेतृत्व तक पहुंच बनाने का सिलसिला शुरू हो गया है।

भाजपा के पास स्पष्ट बहुमत होने के कारण नगर निगम में बोर्ड बनना तय माना जा रहा है। ऐसे में अब सबसे बड़ा सवाल यह है कि पार्टी मेयर और डिप्टी मेयर पद के लिए किस चेहरे पर भरोसा जताती है। चुनाव परिणाम आने के बाद संभावित दावेदारों ने पार्टी के वरिष्ठ नेताओं से संपर्क साधना शुरू कर दिया है। संगठन स्तर से लेकर सामाजिक समीकरणों तक हर पहलू को ध्यान में रखते हुए नामों पर चर्चा होने की संभावना है।

मेयर पद के लिए दावेदारी करने वाले पार्षद अपने-अपने स्तर पर समर्थन जुटाने में लगे हुए हैं। कोई संगठन में अपनी सक्रियता को आधार बना रहा है तो कोई लंबे राजनीतिक अनुभव और क्षेत्र में पकड़ को अपनी ताकत बता रहा है। वहीं कुछ दावेदार सामाजिक समीकरणों के आधार पर भी अपनी दावेदारी मजबूत करने की कोशिश कर रहे हैं।

नगर निगम की राजनीति में मेयर का पद बेहद महत्वपूर्ण माना जाता है। शहर के विकास कार्यों, योजनाओं के क्रियान्वयन और नगर निगम के प्रशासनिक फैसलों में मेयर की अहम भूमिका होती है। यही वजह है कि इस पद के लिए पार्टी के भीतर कई नाम सामने आते हैं और अंतिम फैसला नेतृत्व के स्तर पर किया जाता है।

भाजपा इस बार मेयर चयन में राजनीतिक संतुलन बनाने की कोशिश कर सकती है। पार्टी के सामने एक तरफ अनुभवी और सक्रिय पार्षदों को मौका देने की चुनौती होगी, वहीं दूसरी ओर सामाजिक समीकरणों को साधना भी जरूरी होगा। पिछले चुनावों और स्थानीय राजनीतिक परिस्थितियों को देखते हुए पार्टी हर पहलू का आकलन कर सकती है।

डिप्टी मेयर पद को लेकर भी भाजपा में हलचल शुरू हो गई है। इस पद के लिए भी कई पार्षद दावेदार माने जा रहे हैं। मेयर और डिप्टी मेयर के चयन में पार्टी संगठन की राय के साथ-साथ निर्वाचित पार्षदों की सहमति भी महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकती है।

हालांकि, नगर निगम के चार वार्डों में री-पोलिंग के कारण चुनाव प्रक्रिया का अगला चरण कुछ समय के लिए प्रभावित हुआ है। री-पोलिंग और परिणाम के बाद ही मेयर चुनाव की प्रक्रिया आगे बढ़ेगी। इस दौरान भाजपा को अपने उम्मीदवारों के चयन के लिए पर्याप्त समय मिल जाएगा।

फिलहाल भाजपा में मेयर और डिप्टी मेयर पद को लेकर सियासी सरगर्मी बढ़ गई है। 53 पार्षदों के समर्थन के साथ पार्टी मजबूत स्थिति में है, लेकिन कुर्सी किसे मिलेगी, इसका फैसला पार्टी नेतृत्व के हाथ में होगा। आने वाले दिनों में संभावित नामों को लेकर चर्चाएं और तेज होने की उम्मीद है।