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मातृकुण्डिया बांध विवाद गहराया, साढ़े चार माह से किसानों का धरना जारी; समाधान की मांग तेज

 

राजस्थान के रेलमगरा क्षेत्र स्थित मातृकुण्डिया बांध से जुड़ी समस्याएं अब केवल तकनीकी मुद्दा नहीं रह गई हैं, बल्कि यह किसानों के धैर्य और प्रशासनिक संवेदनशीलता की बड़ी परीक्षा बन चुकी हैं। बांध से प्रभावित गांवों के किसान पिछले साढ़े चार माह से अधिक समय से बांध के गेटों पर अनिश्चितकालीन धरने पर बैठे हैं, लेकिन अब तक उनकी मांगों पर कोई ठोस कार्रवाई नहीं हो पाई है।

किसानों का कहना है कि बांध से जुड़े विभिन्न मुद्दों को लेकर उन्होंने कई बार प्रशासन और संबंधित विभागों को ज्ञापन सौंपे और बातचीत की कोशिश भी की, लेकिन समस्या का स्थायी समाधान नहीं निकल पाया। धरने पर बैठे किसान अपनी मांगों को लेकर लगातार आवाज उठा रहे हैं, लेकिन सरकारी स्तर पर कार्रवाई की गति बेहद धीमी बताई जा रही है।

धरने के दौरान किसानों का कहना है कि उनकी समस्याएं सिंचाई, पानी के वितरण और बांध प्रबंधन से जुड़ी हैं, जिनका सीधा असर उनकी फसलों और आजीविका पर पड़ रहा है। लंबे समय से चल रहे इस आंदोलन के कारण क्षेत्र में तनाव का माहौल बना हुआ है।

किसानों ने आरोप लगाया है कि उनकी समस्याओं को गंभीरता से नहीं लिया जा रहा है, जिसके चलते उन्हें मजबूरी में धरना जारी रखना पड़ रहा है। उनका कहना है कि जब तक उनकी मांगों का समाधान नहीं होगा, तब तक वे अपना आंदोलन खत्म नहीं करेंगे।

वहीं, प्रशासन की ओर से बातचीत और समाधान के प्रयासों की बात कही जा रही है, लेकिन जमीनी स्तर पर कोई बड़ा बदलाव दिखाई नहीं दे रहा है। इस मुद्दे को लेकर स्थानीय स्तर पर राजनीतिक और सामाजिक दबाव भी बढ़ता जा रहा है।

विशेषज्ञों का मानना है कि इस तरह के लंबे आंदोलन किसानों के लिए कठिनाई बढ़ाते हैं और सरकार को समय रहते संवाद और समाधान की दिशा में ठोस कदम उठाने चाहिए। जल संसाधन से जुड़े मामलों में पारदर्शिता और संतुलन बनाए रखना बेहद जरूरी होता है, ताकि किसानों और प्रशासन के बीच विश्वास कायम रह सके।

फिलहाल, मातृकुण्डिया बांध विवाद का समाधान दूर नजर आ रहा है और किसान अपनी मांगों को लेकर अडिग हैं। अब सभी की नजर इस बात पर टिकी है कि प्रशासन कब तक इस गंभीर समस्या का समाधान निकाल पाता है और किसानों को राहत मिलती है।