करोड़ों का राजस्व देने वाली मंडियां बदहाल, किसानों को झेलनी पड़ रही भारी परेशानियां
जिले की कृषि उपज मंडियां सरकार को हर साल करोड़ों रुपये का राजस्व देने के बावजूद बदहाली का शिकार बनी हुई हैं। जानकारी के अनुसार, ये मंडियां प्रतिवर्ष करीब 29 करोड़ रुपये का राजस्व सरकार को देती हैं, लेकिन इसके बावजूद यहां बुनियादी सुविधाओं और कर्मचारियों की भारी कमी बनी हुई है। इसका खामियाजा सीधे तौर पर किसानों को भुगतना पड़ रहा है।
मंडियों में कर्मचारियों की कमी गंभीर समस्या बनी हुई है। कई मंडियों में 15 स्वीकृत पदों में से 14 पद खाली पड़े हैं, जिससे पूरा काम ठेका कर्मचारियों के भरोसे चल रहा है। इसका असर नीलामी प्रक्रिया और सरकारी खरीद पर साफ तौर पर देखने को मिल रहा है, जहां अक्सर देरी और अव्यवस्था की स्थिति बनी रहती है।
स्थिति यह है कि जिले की मंडियों का संचालन एक ही सचिव के भरोसे चल रहा है। प्रशासनिक लापरवाही का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि जिले से करीब साढ़े तीन सौ किलोमीटर दूर बैठे अधिकारी को दो-दो मंडियों का अतिरिक्त प्रभार सौंप दिया गया है। ऐसे में मंडियों की नियमित निगरानी और संचालन प्रभावित हो रहा है।
जिले की सात प्रमुख मंडियों में से केवल झालरापाटन मंडी में ही स्थायी सचिव नियुक्त है, जबकि बाकी मंडियां कार्यवाहक अधिकारियों के भरोसे चल रही हैं। इनमें से दो मंडियों का अतिरिक्त कार्यभार भीलवाड़ा जिले के मांडलगढ़ मंडी सचिव को दिया गया है। करीब 300 किलोमीटर दूर से दो मंडियों का संचालन करना बेहद कठिन साबित हो रहा है।
मंडियों की बदहाल व्यवस्था के कारण किसानों को कई तरह की समस्याओं का सामना करना पड़ रहा है। समय पर नीलामी नहीं होने से किसानों की उपज लंबे समय तक मंडियों में पड़ी रहती है, जिससे नुकसान की आशंका बढ़ जाती है। वहीं, सुरक्षा व्यवस्था कमजोर होने के कारण जिंस चोरी की घटनाएं भी सामने आ रही हैं, जिससे किसानों में असुरक्षा का माहौल बना हुआ है।
किसानों और व्यापारियों ने मांग की है कि मंडियों में स्थायी कर्मचारियों की नियुक्ति की जाए और बुनियादी सुविधाओं को दुरुस्त किया जाए, ताकि व्यवस्था सुचारु रूप से चल सके। उनका कहना है कि जब मंडियां सरकार को इतना बड़ा राजस्व दे रही हैं, तो उनके विकास और व्यवस्थाओं पर भी उतना ही ध्यान दिया जाना चाहिए।
कुल मिलाकर, यह स्थिति प्रशासनिक उदासीनता को दर्शाती है, जिसे सुधारने के लिए जल्द ठोस कदम उठाना जरूरी है, ताकि किसानों को राहत मिल सके और मंडियों की कार्यप्रणाली बेहतर हो सके।