APAR ID बनाने के नियमों में बड़ा बदलाव, अब अभिभावक की सहमति जरूरी
राजस्थान में “वन नेशन-वन स्टूडेंट” विजन के तहत विद्यार्थियों की APAR ID (अपार आईडी) बनाने की प्रक्रिया में बड़ा बदलाव किया गया है। अब राज्य के सभी सरकारी और गैर-सरकारी स्कूलों में पढ़ रहे छात्रों की यह आईडी बिना माता-पिता या वैधानिक अभिभावक की लिखित सहमति के नहीं बनाई जा सकेगी।
राजस्थान स्कूल शिक्षा परिषद ने इस संबंध में स्पष्ट निर्देश जारी करते हुए कहा है कि यदि कोई अभिभावक अपने बच्चे की अपार आईडी नहीं बनवाना चाहता, तो स्कूलों को उनकी असहमति भी लिखित रूप में दर्ज करनी होगी। यह फैसला छात्रों के डेटा और गोपनीयता को ध्यान में रखते हुए लिया गया माना जा रहा है।
इस संबंध में डॉ. रश्मि शर्मा, जो राज्य परियोजना निदेशक एवं आयुक्त हैं, ने बुधवार को प्रदेश के सभी मुख्य जिला शिक्षा अधिकारियों को सख्त निर्देश जारी किए हैं। उन्होंने कहा है कि सभी स्कूल इस नई व्यवस्था का पालन सुनिश्चित करें और किसी भी प्रकार की लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जाएगी।
अब तक कई स्कूलों में अपार आईडी बनाने की प्रक्रिया तेजी से चल रही थी, लेकिन अभिभावकों की जानकारी या स्पष्ट सहमति के बिना भी कई जगह आईडी बनाए जाने की शिकायतें सामने आई थीं। इसी को देखते हुए यह नया निर्देश लागू किया गया है, ताकि पारदर्शिता बनी रहे और अभिभावकों की भूमिका सुनिश्चित हो सके।
शिक्षा विभाग के अनुसार, अपार आईडी का उद्देश्य प्रत्येक छात्र का एक यूनिक डिजिटल रिकॉर्ड तैयार करना है, जिससे उसकी शैक्षणिक प्रगति, उपलब्धियां और अन्य जानकारी एक ही प्लेटफॉर्म पर सुरक्षित रखी जा सके। यह प्रणाली भविष्य में छात्रों के लिए स्कूल बदलने या उच्च शिक्षा में प्रवेश के दौरान भी उपयोगी साबित होगी।
हालांकि, इस नए नियम के लागू होने के बाद स्कूलों के लिए प्रक्रिया थोड़ी जटिल हो सकती है, क्योंकि अब उन्हें प्रत्येक छात्र के लिए अभिभावकों की लिखित सहमति या असहमति लेना अनिवार्य होगा। इसके लिए स्कूलों को अतिरिक्त प्रशासनिक कार्य भी करना पड़ेगा।