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हर रोज मूमल से मिलने के लिए 100 कोस का सफर करता था महिन्द्रा, वीडियो में जाने उस काले दिन की कहानी जब उजाड़ गई दोनों की दुनिया 

 

जैसलमेर में सदियों पहले पनपा मूमल-महिंद्रा का प्रेम आज भी लोगों के जेहन में बसा है और टीलों का यह शहर बेपनाह प्यार की कहानियों से महक रहा है। अमरकोट (अब पाकिस्तान) का रहने वाला महिन्द्रा, जैसलमेर की प्राचीन राजधानी लोद्रवा में रहने वाली अद्वितीय सुंदरी मूमल से मिलने के लिए प्रतिदिन ऊंट की पीठ पर सौ कोस का सफर तय करता था। वहां मूमल घास के मैदान में बैठकर महिन्द्रा का इंतजार करती और जब वह आता तो दोनों प्रेम करते। लोद्रवा में मूमल का यह घास का मैदान आज भी खंडहर के रूप में मौजूद है। इसे देखने वाले मूमल-महिन्द्रा की सदियों पुरानी प्रेम कहानी में खो जाते हैं। इसे इतिहास में भले ही जगह न मिली हो, लेकिन मूमल-महिन्द्रा का प्रेम मरुस्थलीय क्षेत्र की लोक संस्कृति का अभिन्न अंग बना हुआ है।

<a href=https://youtube.com/embed/zWoxsqEDzNY?autoplay=1&mute=1><img src=https://img.youtube.com/vi/zWoxsqEDzNY/hqdefault.jpg alt=""><span><div class="youtube_play"></div></span></a>" style="border: 0px; overflow: hidden"" title="Mahendra Mumal Love Story | विश्व की सबसे सुंदर राजकुमारी मूमल की अधूरी प्रेमकहानी। महेंद्र-मूमल" width="696">

काक नदी के तट पर बना था मूमल का मंदिर

सैकड़ों वर्ष पूर्व रेगिस्तान में बहने वाली काक नदी के तट पर लोद्रवा में मूमल का मंदिर बना था, जिसका वर्णन लोकगीतों और किंवदंतियों में मिलता है। लोद्रवापुर में शिव मंदिर के पास मूमल के मंदिर के अवशेष आज भी मौजूद हैं, जो इस प्रेम कहानी के मूक गवाह हैं। यहां आने वाले पर्यटक खंडहर के रूप में नजर आने वाले मंदिर को देखकर उन दिनों की कल्पना करते हैं, जब महेंद्र अपनी प्रेमिका मूमल से मिलने के लिए रेगिस्तान को चीरते हुए अमरकोट से यहां आया करता था। लोद्रवा में मूमल का मंदिर देखकर देशी-विदेशी पर्यटक इस प्रेम कहानी से प्रभावित हुए बिना नहीं रह पाते।

मूमल-महिंद्रा की दुखद कहानी
मूमल-महिंद्रा की प्रेम कहानी को इतिहास और साहित्य में अलग-अलग रूपों में प्रस्तुत किया गया है। राजस्थानी के अलावा इस कहानी को सिंधी और गुजराती भाषाओं में भी अलग-अलग नामों से लिखा गया है। सभी कहानियों में यह एक दुखद कहानी है। जिसमें यह प्रेमी जोड़ा मिल नहीं पाया। रेगिस्तानी क्षेत्र में कही जाने वाली कहानी के अनुसार महिन्द्रा प्रतिदिन अमरकोट से ऊँट पर सवार होकर सौ मील दूर लोद्रवा स्थित मूमल के महल में उससे मिलने आता था और भोर होने से पहले ही लौट जाता था। एक दिन महिन्द्रा ने मूमल को पुरुष वेश में उसकी पत्नी सुमल के साथ देख लिया, जिससे उसके मन में दुर्भावना घर कर गई। इसके बाद वह मूमल से मिले बिना ही वहाँ से लौट आया और फिर कभी उसके पास नहीं लौटा। महिन्द्रा के कई दिनों तक लोद्रवा न आने के कारण मूमल भी विरह वेदना में जलती रही। जब भ्रम दूर हुआ तो महिन्द्रा भी पागल हो गया। कहानियों में मूमल को सुन्दर तथा महिन्द्रा को आकर्षक व रूपवान युवक के रूप में दर्शाया गया है। अन्तर्राष्ट्रीय ख्यातिप्राप्त मरु महोत्सव में इन दोनों की जोड़ी को लेकर प्रतियोगिता भी आयोजित की जाती है।