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महाराजा गंगासिंह ने 1938 में ही बनवाया था जैसलमेर तक नहर का नक्शा, बनी तो इंदिरा गांधी का नाम दे दिया गया, रेगिस्तान में जल क्रांति की पूरी कहानी

 

राजस्थान के थार रेगिस्तान में जहां कभी दूर-दूर तक रेत के धोरों के अलावा कुछ दिखाई नहीं देता था और राहगीर भी इन इलाकों से गुजरने से कतराते थे, वहां पानी पहुंचाने का सपना सबसे पहले बीकानेर रियासत के महाराजा गंगासिंह ने देखा था। उनकी यही दूरदर्शिता आगे चलकर भारत की सबसे बड़ी सिंचाई परियोजनाओं में से एक इंदिरा गांधी नहर की नींव बनी।

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ऐतिहासिक रिकॉर्ड के अनुसार, महाराजा गंगासिंह ने रेगिस्तानी इलाकों को हरियाली में बदलने के उद्देश्य से गंग नहर (गंग कैनाल) का निर्माण करवाया, जो वर्ष 1927 में पूरी हुई। यह उस समय की एक बड़ी इंजीनियरिंग उपलब्धि मानी जाती थी, जिसने रेगिस्तान में पानी लाकर कृषि और जीवन की संभावनाओं को जन्म दिया।

इसके बाद उन्होंने इंजीनियर कंवरसेन को बीकानेर से जैसलमेर तक दूसरी बड़ी कैनाल का विस्तृत नक्शा तैयार करने का निर्देश दिया। यह महत्वाकांक्षी योजना वर्ष 1938 में तैयार भी हो गई थी, लेकिन उस समय धन की कमी और तकनीकी सीमाओं के कारण इसे अमल में नहीं लाया जा सका।

आजादी के बाद इस अधूरे सपने को नई सरकारों ने आगे बढ़ाया। सतलुज और ब्यास नदियों के अतिरिक्त जल को राजस्थान के रेगिस्तानी इलाकों तक पहुंचाने के लिए एक विशाल सिंचाई परियोजना का निर्माण शुरू हुआ, जिसे बाद में विकसित कर “इंदिरा गांधी नहर” का रूप दिया गया।

यह नहर धीरे-धीरे भारत की सबसे लंबी सिंचाई प्रणालियों में शामिल हो गई और राजस्थान के पश्चिमी जिलों—श्रीगंगानगर, बीकानेर और जैसलमेर—की कृषि व्यवस्था को पूरी तरह बदल दिया। जहां कभी पानी की भारी कमी थी, वहां अब खेत लहलहाने लगे।

हालांकि इस परियोजना के नामकरण को लेकर इतिहास में विवाद और राजनीति भी देखने को मिली। वर्ष 1984 में इस विशाल नहर का नाम तत्कालीन प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी के नाम पर रख दिया गया। वहीं दूसरी ओर, इसके मूल परिकल्पनाकार महाराजा गंगासिंह के योगदान को अपेक्षाकृत सीमित पहचान मिली। उनके नाम पर केवल गंग कैनाल और इंजीनियर कंवरसेन के नाम पर आरडी 620 से निकलने वाली एक लिफ्ट प्रणाली ही दर्ज है।

समय के साथ नहर और उसकी शाखाओं के नामकरण को लेकर राजनीतिक प्रभाव भी देखने को मिला, जहां अलग-अलग दौर में सत्ता और प्रभाव के अनुसार नाम रखे गए। यह भी एक सच्चाई है कि इस परियोजना के पीछे कई व्यक्तियों और चरणों का योगदान रहा है, लेकिन सभी को समान ऐतिहासिक पहचान नहीं मिल सकी।

आज इंदिरा गांधी नहर केवल एक सिंचाई परियोजना नहीं, बल्कि राजस्थान के रेगिस्तान में जीवन की धारा बन चुकी है। साथ ही यह इतिहास की उस लंबी यात्रा का प्रतीक भी है, जिसमें एक शाही दूरदर्शिता, अधूरे सपने, और आधुनिक विकास—तीनों की झलक मिलती है।