लंदन में रहने वाले पिता को कोर्ट से राहत, वीडियो में देंखे अब वीडियो कॉल पर कर सकेंगे बेटी से बात; मां को दिए खास निर्देश
Jaipur की फैमिली कोर्ट ने एक अहम फैसले में कहा है कि किसी बच्ची को उसके पिता के प्यार और स्नेह से दूर नहीं किया जा सकता। कोर्ट ने लंदन में रह रहे एक पिता को बड़ी अंतरिम राहत देते हुए अपनी साढ़े तीन साल की बेटी से नियमित रूप से बात करने का अधिकार दिया है।फैमिली कोर्ट-4 ने पिता की ओर से दायर याचिका पर सुनवाई करते हुए मां को निर्देश दिया कि वह हर महीने के दूसरे और चौथे रविवार को दोपहर 12 बजे से डेढ़ बजे तक वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए बच्ची की अपने पिता से बातचीत करवाए। अदालत ने कहा कि बच्चे के मानसिक और भावनात्मक विकास के लिए दोनों माता-पिता का संपर्क बेहद जरूरी होता है।
मामले में पिता फिलहाल London में रह रहे हैं, जबकि बच्ची अपनी मां के साथ जयपुर में रह रही है। पिता ने अदालत में याचिका दायर कर कहा था कि उन्हें अपनी बेटी से मिलने और बात करने का अवसर नहीं दिया जा रहा, जिससे वह मानसिक रूप से परेशान हैं। उन्होंने अदालत से बच्ची से संपर्क बनाए रखने की अनुमति मांगी थी।सुनवाई के दौरान अदालत ने दोनों पक्षों की दलीलें सुनीं और कहा कि किसी भी परिस्थिति में बच्चे को माता-पिता में से किसी एक के स्नेह से पूरी तरह अलग नहीं किया जा सकता। कोर्ट ने यह भी माना कि तकनीक के इस दौर में वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए पिता-बेटी के रिश्ते को बनाए रखा जा सकता है।
अदालत ने अपने आदेश में मां को एक और महत्वपूर्ण निर्देश दिया है। कोर्ट ने कहा कि बच्ची की शिक्षा और स्वास्थ्य से जुड़ी हर महीने की प्रोग्रेस रिपोर्ट भी पिता को भेजी जाएगी। इसमें स्कूल, स्वास्थ्य जांच और अन्य जरूरी जानकारी शामिल होगी, ताकि पिता अपनी बेटी के विकास और स्थिति से लगातार जुड़े रह सकें।कानूनी विशेषज्ञों का कहना है कि पारिवारिक विवादों में अदालतें अब बच्चों के भावनात्मक अधिकारों को भी प्राथमिकता देने लगी हैं। इस तरह के फैसले यह सुनिश्चित करने की कोशिश करते हैं कि पति-पत्नी के विवाद का असर बच्चों के भविष्य और मानसिक स्थिति पर कम से कम पड़े।
फैमिली कोर्ट के इस फैसले को बाल अधिकारों और सह-अभिभावकता के दृष्टिकोण से महत्वपूर्ण माना जा रहा है। अदालत ने साफ संकेत दिया कि अलगाव या दूरी के बावजूद बच्चे का दोनों माता-पिता से जुड़ाव बना रहना जरूरी है। फिलहाल अदालत के आदेश के बाद अब पिता अपनी बेटी से नियमित रूप से बातचीत कर सकेंगे, जिससे लंबे समय से चली आ रही दूरी कुछ हद तक कम होने की उम्मीद जताई जा रही है।