बिहार में अफसरशाही पर विधायकों का गुस्सा, विधानसभा समितियों ने उठाए सवाल; स्पीकर प्रेम कुमार ने मुख्य सचिव से बातचीत का किया ऐलान
बिहार में कार्यपालिका और विधायिका के बीच टकराव की स्थिति सामने आई है। मानसून सत्र की समाप्ति के बाद सोमवार को बिहार विधानसभा की सभी 24 समितियों की समीक्षा बैठक आयोजित की गई। बैठक में विधायकों ने अधिकारियों के रवैये को लेकर नाराजगी जताई और अफसरशाही पर गंभीर सवाल खड़े किए।
बैठक के दौरान सभी विधानसभा समितियों के सभापतियों ने एक सुर में आरोप लगाया कि प्रदेश में अफसरशाही पूरी तरह बेलगाम हो चुकी है। विधायकों का कहना था कि कई मामलों में अधिकारियों की ओर से समितियों की सिफारिशों और निर्देशों को गंभीरता से नहीं लिया जा रहा है, जिससे जनप्रतिनिधियों की भूमिका प्रभावित हो रही है।
विधायकों ने आरोप लगाया कि अधिकारियों का व्यवहार कई बार अड़ियल नजर आता है। विधानसभा समितियां जनता से जुड़े मुद्दों की समीक्षा करती हैं और सरकार को सुझाव देती हैं, लेकिन यदि अधिकारी इन निर्देशों पर समय पर कार्रवाई नहीं करते हैं तो इसका सीधा असर जनता की समस्याओं के समाधान पर पड़ता है। बैठक में उठे इन मुद्दों को देखते हुए विधानसभा अध्यक्ष डॉ. प्रेम कुमार ने भी सख्त रुख अपनाया। उन्होंने कहा कि इस विषय पर जल्द ही उच्च स्तर पर चर्चा की जाएगी। स्पीकर ने स्पष्ट किया कि वे एक महीने के भीतर मुख्य सचिव प्रत्यय अमृत से इस मामले को लेकर सीधे बातचीत करेंगे।
विधानसभा अध्यक्ष ने संकेत दिए कि लोकतांत्रिक व्यवस्था में विधायिका और कार्यपालिका के बीच बेहतर समन्वय जरूरी है। अधिकारियों और जनप्रतिनिधियों के बीच तालमेल नहीं होने से शासन व्यवस्था प्रभावित हो सकती है। उन्होंने कहा कि विधानसभा समितियों की गरिमा और अधिकारों का सम्मान होना चाहिए।समीक्षा बैठक में विभिन्न समितियों के कामकाज, लंबित मामलों और अधिकारियों की जवाबदेही को लेकर भी चर्चा हुई। सभापतियों ने कहा कि समितियां जनता के हितों से जुड़े मामलों की निगरानी करती हैं, इसलिए उनके सुझावों और निर्देशों को प्राथमिकता मिलनी चाहिए।
बिहार में यह मुद्दा ऐसे समय सामने आया है, जब सरकार और प्रशासन के बीच बेहतर तालमेल को लेकर लगातार जोर दिया जा रहा है। अब विधानसभा अध्यक्ष और मुख्य सचिव के बीच होने वाली संभावित बैठक पर सभी की नजरें टिकी हुई हैं।यदि इस बैठक में कोई ठोस समाधान निकलता है तो विधायिका और कार्यपालिका के बीच समन्वय बेहतर हो सकता है। वहीं, अधिकारियों के कामकाज और जवाबदेही को लेकर आने वाले दिनों में नए दिशा-निर्देश जारी होने की संभावना भी जताई जा रही है।