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बांसवाड़ा के सरवर गांव में आज भी बुनियादी सुविधाओं का अभाव, विकास से पीछे छूटा

 

बांसवाड़ा जिला मुख्यालय से मात्र दो किलोमीटर दूर स्थित सरवर गांव आज भी बुनियादी सुविधाओं के लिए तरस रहा है। स्वतंत्रता के 75 साल बाद भी इस गांव में सड़क, पानी और शिक्षा जैसी मूलभूत जरूरतें अधूरी हैं। शहर की सीमा से सटा होने के बावजूद सरवर गांव विकास की दौड़ में पीछे छूट गया है।

ग्रामीणों का कहना है कि गांव में सड़कें इतनी खराब हैं कि बारिश में आवागमन मुश्किल हो जाता है। बच्चों के लिए स्कूल तो हैं, लेकिन शिक्षण व्यवस्था और सुविधाएं पर्याप्त नहीं हैं। इसके अलावा, पीने के पानी की समस्या भी गंभीर बनी हुई है। कई घरों में पानी के लिए दिनभर इंतजार करना पड़ता है, जबकि कुछ क्षेत्रों में लोग भारी झाड़-झंखाड़ से होकर पानी तक पहुंचते हैं।

गांववासियों का कहना है कि जिला मुख्यालय से केवल दो किलोमीटर की दूरी होने के बावजूद प्रशासनिक योजनाएं और विकास परियोजनाएं सरवर गांव तक असमान रूप से पहुंची हैं। इसके चलते ग्रामीण कई बार शिकायतें करने के बावजूद बदलाव नहीं देख पा रहे।

स्थानीय ग्रामीण नेता ने कहा, “हमारे गांव को भी शहर की तरह विकास और सुविधाओं का अधिकार मिलना चाहिए। आजादी के इतने साल बाद भी हमें सड़कों, जल आपूर्ति और शिक्षा के मामले में भारी कठिनाइयों का सामना करना पड़ रहा है।”

विशेषज्ञों का कहना है कि शहर की नजदीकी होने के बावजूद ग्रामीण क्षेत्रों में विकास का असमान वितरण एक सामान्य समस्या है। बांसवाड़ा जैसे जिलों में छोटे गांव अक्सर संपर्क और प्रशासनिक योजनाओं से कट जाते हैं, जिससे विकास की रफ्तार धीमी पड़ जाती है।

सरवर गांव की यह स्थिति न केवल ग्रामीणों के जीवन को प्रभावित कर रही है, बल्कि शिक्षा और स्वास्थ्य जैसे महत्वपूर्ण क्षेत्रों में भी बड़ी चुनौतियां पैदा कर रही है। विशेषज्ञों का सुझाव है कि गांव तक विकास योजनाओं की निगरानी और प्रभावी कार्यान्वयन सुनिश्चित किया जाए।

ग्रामीण उम्मीद जताते हैं कि राज्य और जिला प्रशासन जल, सड़क और शिक्षा के क्षेत्र में तत्काल सुधार लाएगा। उनका कहना है कि अगर इन मूलभूत सुविधाओं को समय पर उपलब्ध कराया गया, तो गांव के लोग शहर के साथ तालमेल रखते हुए विकास की रफ्तार में आगे बढ़ सकते हैं।

अंततः, बांसवाड़ा के सरवर गांव की यह स्थिति यह दर्शाती है कि स्वतंत्रता के 75 साल बाद भी कई ग्रामीण क्षेत्रों में बुनियादी सुविधाओं की भारी कमी है। शहर के पास होने के बावजूद विकास की दौड़ में पिछड़ने वाले इस गांव के लिए अब सटीक और प्रभावी प्रशासनिक हस्तक्षेप की जरूरत है, ताकि ग्रामीणों का जीवन स्तर सुधर सके।