×

कोटपूतली-बहरोड़ कोर्ट में 5 घंटे 30 मिनट में सुनाई सजा, वीडियो में देंखे चोरी के तीन दोषियों को 3-3 साल का कठोर कारावास

 

राजस्थान की न्याय व्यवस्था ने गुरुवार को एक ऐतिहासिक उदाहरण पेश किया। पावटा कोर्ट में चार्जशीट पेश होने के महज 5 घंटे 30 मिनट के भीतर जज डॉ. अजय कुमार बिश्नोई ने चोरी के तीन दोषियों को 3-3 साल के कठोर कारावास की सजा सुनाई। इस फैसले से न्याय की त्वरित प्रक्रिया और प्रभावी कानून प्रवर्तन की मिसाल कायम हुई है।

<a style="border: 0px; overflow: hidden" href=https://youtube.com/embed/DFSiEtUNuaI?autoplay=1&mute=1><img src=https://img.youtube.com/vi/DFSiEtUNuaI/hqdefault.jpg alt=""><span><div class="youtube_play"></div></span></a>" style="border: 0px; overflow: hidden;" width="640">

जानकारी के अनुसार, यह घटना 5 जनवरी की रात नारायणपुर मोड़ के पास हुई थी। तीनों चोर हरिओम जनरल स्टोर, श्री श्याम मिष्ठान भंडार, एमएस मोबाइल सेंटर और मानवी हेल्थ केयर के शटर तोड़कर नकदी ले गए थे। इस वारदात ने स्थानीय दुकानदारों और आम नागरिकों में चिंता की लहर पैदा कर दी।

प्रागपुरा थाना प्रभारी भजनाराम की टीम ने घटना के बाद तेजी से जांच शुरू की। टीम ने सबूत जुटाने और CCTV फुटेज की पड़ताल के बाद 27 जनवरी को तीनों आरोपियों को गिरफ्तार कर लिया। गिरफ्तार आरोपियों में विजयपाल और कपिल निवासी गण्डाला (नीमराना) और राजेश निवासी फतेहपुरा (नीमराना) शामिल हैं।

29 जनवरी को चालान कोर्ट में पेश किया गया। इसके बाद पावटा कोर्ट में मामले की सुनवाई शुरू हुई और जज डॉ. अजय कुमार बिश्नोई ने 5 घंटे 30 मिनट में ही फैसला सुनाते हुए तीनों दोषियों को 3-3 साल के कठोर कारावास की सजा दी।

जज ने कहा कि चोरी जैसी घटनाओं के लिए सख्त और तत्काल न्याय आवश्यक है, ताकि अपराधियों को समाज में संदेश मिले और जनता का विश्वास न्याय व्यवस्था पर बना रहे। उन्होंने यह भी कहा कि त्वरित सुनवाई और फैसले से पीड़ितों को न्याय मिलने में कोई विलंब नहीं होना चाहिए।

स्थानीय पुलिस और कोर्ट प्रशासन के अनुसार, इस मामले में तेजी से कार्रवाई ने न केवल न्याय प्रक्रिया को प्रभावी बनाया, बल्कि अपराधियों को भी चेतावनी दी। प्रागपुरा थाना प्रभारी भजनाराम ने बताया कि आरोपियों की गिरफ्तारी और सजा की प्रक्रिया पूरी तरह से कानूनी ढांचे के तहत की गई और किसी भी प्रकार की देरी नहीं हुई।

दुकानदारों ने भी इस त्वरित फैसले की सराहना की और कहा कि इससे उनके मनोबल को बढ़ावा मिला है। उन्होंने पुलिस और न्यायपालिका दोनों के प्रति आभार व्यक्त किया।

विशेषज्ञों का कहना है कि न्याय व्यवस्था में इस प्रकार की त्वरित सुनवाई का उदाहरण पूरे प्रदेश के लिए प्रेरणादायक है। इससे न केवल अपराध पर नियंत्रण बढ़ेगा, बल्कि आम नागरिकों का न्याय प्रणाली पर विश्वास भी मजबूत होगा।

इस घटना ने यह संदेश दिया है कि राजस्थान में अपराध और न्याय के बीच संतुलन बनाए रखने के लिए पुलिस और न्यायपालिका मिलकर काम कर रही हैं। त्वरित कार्रवाई और फैसला सुनाने की प्रक्रिया ने प्रदेश में कानूनी व्यवस्था की साख को और मजबूत किया है।

इस तरह, कोटपूतली-बहरोड़ पावटा कोर्ट में 5 घंटे 30 मिनट में तीन दोषियों को कठोर कारावास की सजा देने की कार्रवाई राजस्थान न्याय व्यवस्था के इतिहास में एक महत्वपूर्ण अध्याय के रूप में दर्ज हो गई है।