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UGC रोल बैक आंदोलन पर करणी सेना का सरकार पर हमला, वीडियो में महिपाल मकराना बोले- शांतिपूर्ण प्रदर्शन पर किया लाठीचार्ज

 

यूजीसी रोल बैक की मांग को लेकर जयपुर में हुए प्रदर्शन के बाद श्री राजपूत करणी सेना के अध्यक्ष महिपाल सिंह मकराना ने पुलिस प्रशासन और राज्य सरकार की कार्रवाई पर गंभीर सवाल उठाए हैं। मंगलवार को आयोजित प्रेस वार्ता में उन्होंने आरोप लगाया कि संगठन शांतिपूर्ण और गांधीवादी तरीके से आंदोलन कर रहा था, लेकिन प्रशासन ने तय सहमति का पालन नहीं किया और प्रदर्शनकारियों पर बिना चेतावनी वाटर कैनन और लाठीचार्ज कर दिया। मकराना ने कहा कि प्रदर्शन को लेकर प्रशासन के साथ पहले से बातचीत हुई थी और संगठन को पानीपेच चौराहे तक जाने की अनुमति दी गई थी। लेकिन जैसे ही प्रदर्शनकारी कालवाड़ पुलिया के नीचे पहुंचे, पुलिस ने अचानक कार्रवाई शुरू कर दी।

'बिना चेतावनी चला वाटर कैनन'

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महिपाल मकराना का आरोप है कि पुलिस ने किसी तरह की पूर्व चेतावनी दिए बिना प्रदर्शनकारियों पर वाटर कैनन का इस्तेमाल किया और बाद में लाठीचार्ज भी किया। उन्होंने दावा किया कि इस कार्रवाई में महिलाओं, बुजुर्गों और बच्चों को भी नहीं बख्शा गया।उनका कहना था कि आंदोलन पूरी तरह शांतिपूर्ण था और प्रदर्शनकारी किसी प्रकार की हिंसा या तोड़फोड़ में शामिल नहीं थे।

'गीता और संविधान लेकर कर रहे थे प्रदर्शन'

करणी सेना अध्यक्ष ने कहा कि प्रदर्शनकारी गांधीवादी तरीके से अपनी मांगें उठा रहे थे। उनके मुताबिक, आंदोलन में शामिल लोग अपने हाथों में भगवद्गीता और भारतीय संविधान लेकर चल रहे थे, ताकि यह संदेश दिया जा सके कि उनका आंदोलन पूरी तरह लोकतांत्रिक और शांतिपूर्ण है।उन्होंने आरोप लगाया कि इसके बावजूद पुलिस ने बल प्रयोग कर प्रदर्शन को रोकने का प्रयास किया।

सरकार और विपक्ष दोनों पर साधा निशाना

महिपाल मकराना ने इस मुद्दे पर राज्य सरकार के साथ-साथ विपक्ष की भूमिका पर भी सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि जनता के मुद्दों पर सभी राजनीतिक दलों को स्पष्ट रुख अपनाना चाहिए और युवाओं की मांगों को गंभीरता से सुनना चाहिए।उन्होंने कहा कि संगठन अपनी मांगों को लेकर पीछे हटने वाला नहीं है और लोकतांत्रिक तरीके से आंदोलन जारी रहेगा।

7 दिन का अल्टीमेटम, सीएम हाउस घेराव की चेतावनी

करणी सेना अध्यक्ष ने सरकार के सामने कई मांगें रखते हुए सात दिन का समय दिया। उन्होंने चेतावनी दी कि यदि निर्धारित समय सीमा के भीतर उनकी मांगों पर सकारात्मक निर्णय नहीं लिया गया, तो संगठन मुख्यमंत्री आवास (सीएम हाउस) का घेराव करेगा।फिलहाल प्रशासन की ओर से इन आरोपों पर विस्तृत प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है। वहीं, पूरे मामले को लेकर राजनीतिक हलकों में भी चर्चा तेज हो गई है। अब सभी की नजर इस बात पर है कि सरकार आंदोलनकारियों की मांगों पर क्या फैसला लेती है और आगे की स्थिति किस दिशा में बढ़ती है।