Kaila Devi Chaitra Lakhi Mela 2026: कैलादेवी का चैत्र लक्खी मेला 16 मार्च से, 13 मार्च से चलेंगी 300 बसें
प्रसिद्ध कैलादेवी मंदिर में इस साल चैत्र लक्खी मेला 2026 16 मार्च से शुरू होने जा रहा है। मेले की तैयारियां प्रशासन और मंदिर समिति द्वारा पूरी कर ली गई हैं, ताकि हजारों श्रद्धालु इस धार्मिक आयोजन में भाग ले सकें।
तीर्थयात्रियों की सुविधा के लिए 13 मार्च से 300 विशेष बसों का संचालन किया जाएगा। ये बसें जिले के विभिन्न हिस्सों और आसपास के शहरों से श्रद्धालुओं को सीधे कैलादेवी मंदिर तक ले जाएंगी। बस सेवा के माध्यम से यात्रियों को भीड़ और परेशानी से बचाया जाएगा।
मेला चैत्र मास में आयोजित होने वाला एक प्रमुख धार्मिक उत्सव है, जिसमें लाखों श्रद्धालु माता कैलादेवी के दर्शन और पूजा-अर्चना के लिए आते हैं। यह मेला स्थानीय संस्कृति और धार्मिक परंपराओं का जीवंत उदाहरण भी माना जाता है।
मंदिर समिति के अध्यक्ष ने बताया कि श्रद्धालुओं के लिए सुविधाजनक आवास, पानी, चिकित्सा और सुरक्षा इंतजाम किए गए हैं। प्रशासन ने भी मेले के दौरान सुरक्षा व्यवस्था कड़ी कर दी है। पुलिस और स्वयंसेवक मेले के मार्गों पर तैनात रहेंगे ताकि श्रद्धालुओं को किसी प्रकार की कठिनाई न हो।
तीर्थयात्रियों को मेले के दौरान लंबी कतारों और भीड़भाड़ से बचाने के लिए मंदिर के विभिन्न हिस्सों में प्रवेश और दर्शन के लिए विशेष मार्ग बनाए गए हैं। साथ ही, श्रद्धालुओं को सतर्क रहने और अपने सामान का ध्यान रखने की भी सलाह दी गई है।
स्थानीय व्यापारियों और दुकानदारों ने भी मेले के लिए अपनी तैयारियां पूरी कर ली हैं। मेले में खाने-पीने, पूजा सामग्री, धार्मिक स्मृति चिन्ह और स्थानीय हस्तशिल्प की दुकानों का विशेष आकर्षण रहेगा।
मेला धार्मिक महत्व के साथ-साथ सामाजिक और सांस्कृतिक मेलजोल का अवसर भी प्रदान करता है। यहां लोग न केवल पूजा-अर्चना करते हैं, बल्कि पारंपरिक गीत, नृत्य और सांस्कृतिक कार्यक्रमों का भी आनंद लेते हैं।
विशेषज्ञों के अनुसार कैलादेवी चैत्र लक्खी मेला पर्यटकों और तीर्थयात्रियों को राजस्थान की धार्मिक और सांस्कृतिक विरासत से जोड़ने का महत्वपूर्ण माध्यम है। यह आयोजन क्षेत्र की अर्थव्यवस्था और पर्यटन को भी बढ़ावा देता है।
कुल मिलाकर, कैलादेवी का चैत्र लक्खी मेला 2026 इस साल 16 मार्च से शुरू हो रहा है और 13 मार्च से चलने वाली 300 बसों की सुविधा से श्रद्धालुओं को यात्रा में आसानी होगी। प्रशासन और मंदिर समिति की तैयारियों के साथ यह मेला धार्मिक आस्था और सांस्कृतिक उत्सव का जीवंत अनुभव प्रदान करेगा।