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जेई भर्ती परीक्षा-2020: पेपर लीक के बावजूद पेपर माफिया का नेटवर्क सक्रिय

 

राजस्थान में जेई (जूनियर इंजीनियर) भर्ती परीक्षा-2020 का मामला फिर से सुर्खियों में है। यह परीक्षा पहले पारदर्शिता और निष्पक्षता के गंभीर उल्लंघन के कारण निरस्त कर दी गई थी। अधिकारियों के अनुसार, परीक्षा का पेपर लीक होने के बाद भर्ती प्रक्रिया को रद्द करना पड़ा। हालांकि, जांच में यह सामने आया है कि पेपर माफिया का नेटवर्क निरंतर सक्रिय रहा और उन्होंने उम्मीदवारों के बीच भ्रष्टाचार और अनियमितताओं को बढ़ावा देना जारी रखा।

जांच रिपोर्ट के अनुसार, पेपर लीक के समय कई तकनीकी और प्रशासनिक कमियों का लाभ उठाते हुए अवैध तरीकों से कुछ समूहों ने परीक्षा में सीधे तौर पर हेरफेर किया। इससे न केवल परीक्षा की विश्वसनीयता को ठेस पहुंची, बल्कि लाखों उम्मीदवारों का समय और मेहनत भी बेकार हो गई। निरस्त परीक्षा के बाद भी पेपर माफिया ने नए तरीके अपनाकर अपने नेटवर्क को सक्रिय रखा और कथित तौर पर कुछ उम्मीदवारों को लाभ पहुंचाया।

राजस्थान लोक सेवा आयोग (RPSC) और संबंधित विभाग अब इस मामले में सख्त कदम उठाने की तैयारी कर रहे हैं। अधिकारियों का कहना है कि यह सुनिश्चित किया जाएगा कि भविष्य में किसी भी भर्ती परीक्षा में ऐसे नेटवर्क की घुसपैठ न हो। इसके लिए तकनीकी निगरानी, पैटर्न की समीक्षा और संदिग्ध गतिविधियों पर सतत नजर रखने की योजना बनाई गई है।

साल 2020 में जेई भर्ती परीक्षा का उद्देश्य योग्य उम्मीदवारों को सरकारी सेवा में लाना था। लेकिन पेपर लीक के कारण यह प्रक्रिया बाधित हो गई। परीक्षा निरस्तीकरण के बाद आयोग ने परीक्षा की सुरक्षा और निष्पक्षता को सुनिश्चित करने के लिए कई सुधारात्मक कदम उठाने की घोषणा की। इसके बावजूद, माफिया नेटवर्क के सक्रिय रहने से यह साबित होता है कि केवल परीक्षा रद्द करना ही समस्या का समाधान नहीं है; इसके लिए मजबूत निगरानी और सख्त कार्रवाई की आवश्यकता है।

विशेषज्ञों का मानना है कि ऐसे नेटवर्क का अस्तित्व शिक्षा और भर्ती प्रणाली के प्रति उम्मीदवारों के विश्वास को कमजोर करता है। उन्होंने कहा कि पेपर माफिया केवल उम्मीदवारों को प्रभावित नहीं करते, बल्कि सरकारी भर्ती प्रणाली में व्यापक भ्रष्टाचार को बढ़ावा देते हैं। ऐसे में यह बेहद जरूरी है कि राज्य सरकार और आयोग मिलकर ठोस रणनीति अपनाएं।

अधिकारियों ने बताया कि अब तकनीकी उपायों, डिजिटल निगरानी और सख्त जांच के माध्यम से भर्ती परीक्षाओं में पारदर्शिता लाने की दिशा में कदम बढ़ाए जा रहे हैं। पेपर लीक और माफिया नेटवर्क के खिलाफ कानूनी कार्रवाई की प्रक्रिया भी जारी है। इसके अलावा, उम्मीदवारों को भी सतर्क रहने और किसी भी संदिग्ध गतिविधि की जानकारी देने की सलाह दी जा रही है।

राजस्थान में जेई भर्ती परीक्षा-2020 का यह विवाद आगामी परीक्षाओं के लिए एक चेतावनी साबित हुआ है। यह घटना दिखाती है कि भर्ती प्रक्रिया में केवल नियमों का पालन ही नहीं, बल्कि उनका प्रभावी क्रियान्वयन और निगरानी भी आवश्यक है। सरकार और आयोग का लक्ष्य अब यह सुनिश्चित करना है कि भविष्य में कोई भी भर्ती परीक्षा संपूर्ण रूप से निष्पक्ष और सुरक्षित हो।

इस घटना ने राज्य में भर्ती परीक्षाओं की प्रक्रिया में सुधार और डिजिटलाइजेशन की जरूरत को और भी स्पष्ट कर दिया है। उम्मीदवारों और आम जनता की नजर अब उन कदमों पर टिकी है, जो यह सुनिश्चित करेंगे कि परीक्षा प्रणाली में भ्रष्टाचार और माफिया का दखल पूरी तरह खत्म हो।