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जयपुर नगर निगम चुनाव: 17 बीजेपी-कांग्रेस प्रत्याशियों की जमानत जब्त, वीडियो में जाने एक वार्ड में दोनों पार्टियों के उम्मीदवार हारे

 

जयपुर नगर निगम चुनाव के नतीजों में बीजेपी ने एक बार फिर बहुमत हासिल कर बोर्ड बनाने में सफलता हासिल की है। नगर निगम के 150 वार्डों में से 146 वार्डों के परिणाम सोमवार को घोषित किए गए। चुनाव परिणामों के बीच एक दिलचस्प आंकड़ा सामने आया है। बीजेपी और कांग्रेस के कुल 17 प्रत्याशियों की जमानत जब्त हो गई। इनमें बीजेपी के 13 और कांग्रेस के 4 प्रत्याशी शामिल हैं।खास बात यह रही कि एक वार्ड में बीजेपी और कांग्रेस दोनों ही प्रमुख दलों के प्रत्याशियों की जमानत जब्त हो गई। इस वार्ड में दोनों पार्टियों के उम्मीदवारों को निर्दलीय प्रत्याशियों ने पीछे छोड़ दिया। यहां पहले, दूसरे और तीसरे स्थान पर निर्दलीय उम्मीदवार रहे। इससे साफ है कि कुछ वार्डों में स्थानीय मुद्दों और उम्मीदवारों की व्यक्तिगत पकड़ ने राजनीतिक दलों के प्रभाव को भी चुनौती दी।

बीजेपी के 13 प्रत्याशियों की जमानत जब्त

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नगर निगम चुनाव में बीजेपी ने भले ही बहुमत हासिल कर लिया हो, लेकिन उसके सभी प्रत्याशी जीत हासिल करने में सफल नहीं रहे। पार्टी के 13 प्रत्याशियों की जमानत जब्त हुई है। इनमें कुछ वार्ड ऐसे भी रहे, जहां बीजेपी प्रत्याशियों को बेहद कम वोट मिले।आंकड़ों के मुताबिक सात वार्डों में बीजेपी प्रत्याशियों को एक हजार से भी कम वोट मिले। इससे पता चलता है कि पार्टी के मजबूत संगठन और व्यापक चुनावी प्रदर्शन के बावजूद कुछ वार्डों में स्थानीय समीकरण बीजेपी के पक्ष में नहीं रहे।

कांग्रेस के चार उम्मीदवारों की जमानत जब्त

कांग्रेस ने इस बार जयपुर नगर निगम चुनाव में पूरी ताकत के साथ मैदान में उतरकर मुकाबला किया। पार्टी बोर्ड बनाने में सफल नहीं हो सकी और बीजेपी ने बहुमत हासिल कर लिया, लेकिन वार्ड स्तर पर कांग्रेस का प्रदर्शन कई जगह मजबूत रहा। कुल चार कांग्रेस प्रत्याशियों की जमानत जब्त हुई है।चुनाव परिणामों के वार्डवार आंकड़ों पर नजर डालें तो कई जगह कांग्रेस प्रत्याशी बीजेपी उम्मीदवारों को कड़ी टक्कर देते नजर आए। यही वजह है कि नगर निगम में बीजेपी का बोर्ड बनने के बावजूद दोनों प्रमुख दलों के बीच वोट प्रतिशत का अंतर बहुत ज्यादा नहीं रहा।

कई वार्डों में निर्दलीयों ने बिगाड़ा समीकरण

जयपुर नगर निगम चुनाव में निर्दलीय प्रत्याशियों की भूमिका भी महत्वपूर्ण रही। जिस वार्ड में बीजेपी और कांग्रेस दोनों प्रत्याशियों की जमानत जब्त हुई, वहां तीनों शीर्ष स्थानों पर निर्दलीय उम्मीदवार रहे। इससे यह संकेत मिलता है कि कुछ वार्डों में मतदाताओं ने पार्टी से ज्यादा स्थानीय प्रत्याशी और स्थानीय मुद्दों को प्राथमिकता दी।कुल मिलाकर जयपुर नगर निगम चुनाव का परिणाम बीजेपी के लिए बोर्ड बनाने के लिहाज से अहम रहा, लेकिन वार्डवार आंकड़े बताते हैं कि हर क्षेत्र में पार्टी का प्रदर्शन एक जैसा नहीं रहा। वहीं कांग्रेस भले ही सत्ता हासिल नहीं कर सकी, लेकिन कई वार्डों में उसका प्रदर्शन बीजेपी के मुकाबले मजबूत रहा। आने वाले समय में दोनों दलों के लिए इन वार्डवार नतीजों का विश्लेषण संगठन और स्थानीय राजनीति के लिहाज से महत्वपूर्ण माना जाएगा।