HPV टीकाकरण अभियान में जयपुर पिछड़ा, सर्वाइकल कैंसर से बचाव के लिए चल रहे अभियान में राजधानी की रैंकिंग चिंताजनक
किशोरियों को सर्वाइकल कैंसर से बचाने के उद्देश्य से चलाए जा रहे ह्यूमन पैपिलोमा वायरस (HPV) टीकाकरण अभियान में राजधानी जयपुर की स्थिति चिंताजनक सामने आई है। केंद्र सरकार की ओर से जारी रिपोर्ट के अनुसार, प्रदेश में टीकाकरण की प्रगति के मामले में जयपुर-प्रथम 39वें और जयपुर-द्वितीय 42वें स्थान पर है।
सर्वाइकल कैंसर से बचाव के लिए HPV वैक्सीन को बेहद महत्वपूर्ण माना जाता है। सरकार की ओर से किशोरियों को समय पर टीका लगाने के लिए विशेष अभियान चलाया जा रहा है, ताकि भविष्य में इस बीमारी के खतरे को कम किया जा सके। लेकिन जयपुर जैसे बड़े शहर में ही टीकाकरण की रफ्तार अपेक्षाकृत धीमी होने से स्वास्थ्य विभाग की चिंता बढ़ गई है।
केंद्र सरकार की रिपोर्ट में सामने आए आंकड़ों के मुताबिक, प्रदेश के कई जिलों ने HPV टीकाकरण में जयपुर से बेहतर प्रदर्शन किया है। वहीं, राजधानी के दोनों जिलों की रैंकिंग नीचे रहने से अभियान की प्रभावी मॉनिटरिंग और जागरूकता को लेकर सवाल उठ रहे हैं।
स्वास्थ्य विशेषज्ञों का कहना है कि सर्वाइकल कैंसर महिलाओं में होने वाला एक गंभीर रोग है, लेकिन समय रहते HPV वैक्सीन लगवाकर इसके खतरे को काफी हद तक कम किया जा सकता है। इसके लिए अभिभावकों और किशोरियों में जागरूकता बढ़ाना बेहद जरूरी है।
विशेषज्ञों के अनुसार, कई बार टीकाकरण को लेकर लोगों में जानकारी का अभाव, भ्रांतियां और झिझक जैसी वजहें सामने आती हैं। इसके कारण पात्र किशोरियों तक वैक्सीन की पहुंच प्रभावित होती है।
स्वास्थ्य विभाग अब अभियान में तेजी लाने की तैयारी कर रहा है। इसके लिए स्कूलों, स्वास्थ्य केंद्रों और अन्य माध्यमों से लोगों को जागरूक करने पर जोर दिया जा रहा है। अधिकारियों का कहना है कि ज्यादा से ज्यादा किशोरियों को टीकाकरण से जोड़ने के लिए विशेष प्रयास किए जाएंगे।
HPV वैक्सीन को लेकर स्वास्थ्य विभाग लगातार लोगों से अपील कर रहा है कि पात्र आयु वर्ग की किशोरियों का समय पर टीकाकरण करवाएं। इससे न केवल उन्हें भविष्य में गंभीर बीमारी से सुरक्षा मिलेगी, बल्कि सर्वाइकल कैंसर के मामलों में भी कमी लाई जा सकेगी।
जयपुर की कम रैंकिंग के बाद अब स्वास्थ्य विभाग के सामने चुनौती है कि अभियान की गति बढ़ाकर राजधानी को बेहतर प्रदर्शन करने वाले जिलों की सूची में लाया जाए। इसके लिए जमीनी स्तर पर जागरूकता और टीकाकरण दोनों को मजबूत करने की जरूरत है।