जयपुर हाई कोर्ट ने अवैध मंदिरों को हटाने का आदेश दिया, नगर निगम को रिपोर्ट पेश करने को कहा
राजस्थान हाई कोर्ट ने जयपुर शहर में फुटपाथ, सड़क और सार्वजनिक मार्गों पर अवैध रूप से बने मंदिरों को हटाने के लिए सख्त आदेश जारी किया है। यह आदेश जस्टिस संजीव प्रकाश शर्मा और जस्टिस संगीता शर्मा की खंडपीठ ने सुनाया। अदालत ने यह फैसला सनी मीणा की जनहित याचिका पर लिया।
अदालत ने नगर निगम आयुक्त को निर्देश दिए हैं कि वे अगली सुनवाई तक शपथपत्र प्रस्तुत करें और इसमें स्पष्ट रूप से बताएं कि शहर में फुटपाथ, सड़क और अन्य सार्वजनिक जगहों पर बने अवैध मंदिरों को हटाने के लिए अब तक क्या कदम उठाए गए हैं। अदालत ने इस मामले में तेजी दिखाने की अपील की है और कहा कि सार्वजनिक संपत्ति और नागरिकों के अधिकारों की सुरक्षा सर्वोपरि है।
सनी मीणा की जनहित याचिका में अदालत से मांग की गई थी कि जयपुर शहर में बढ़ते अवैध निर्माण और विशेषकर फुटपाथ, सड़कों और सार्वजनिक मार्गों पर बने मंदिरों पर अंकुश लगाया जाए। याचिकाकर्ता ने कहा कि इन अवैध निर्माणों से न केवल सार्वजनिक आवागमन प्रभावित होता है, बल्कि नगर निगम और प्रशासन की निगरानी भी कमजोर पड़ती है।
जस्टिस संजीव प्रकाश शर्मा और जस्टिस संगीता शर्मा की खंडपीठ ने कहा कि शहर की सड़कों और फुटपाथों का उपयोग सभी नागरिकों के लिए सुरक्षित और सुगम होना चाहिए। उन्होंने नगर निगम को स्पष्ट निर्देश दिए कि कानून के अनुसार कार्रवाई की जाए और अवैध निर्माण हटाने में किसी भी प्रकार की ढील न बरती जाए।
विशेषज्ञों का कहना है कि यह आदेश जयपुर जैसे बड़े शहर में सार्वजनिक स्थानों की सुरक्षा और नियमों के पालन के लिए महत्वपूर्ण कदम है। उन्होंने कहा कि अवैध मंदिरों या अन्य निर्माणों को हटाने से न केवल सड़क सुरक्षा सुनिश्चित होगी, बल्कि शहर में शहरी नियोजन और सार्वजनिक सुविधा भी बेहतर होगी।
नगर निगम के अधिकारियों ने अदालत के आदेश का स्वागत किया और कहा कि वे आगामी सुनवाई तक शपथपत्र में सभी किए गए कार्यों और योजनाओं की जानकारी प्रस्तुत करेंगे। अधिकारियों ने यह भी कहा कि शहर में अवैध निर्माणों की पहचान के लिए विशेष टीम गठित की गई है और इसे प्रभावी रूप से काम में लगाया जाएगा।
लोकल नागरिक और दुकानदारों ने अदालत के आदेश का समर्थन किया। उनका कहना है कि फुटपाथ और सड़क पर अवैध मंदिरों के कारण रोज़मर्रा की ज़िंदगी प्रभावित होती थी। उन्होंने कहा कि नगर निगम की सक्रियता और हाई कोर्ट के आदेश से जनता को राहत मिलेगी और शहर का आवागमन सुगम होगा।
राजस्थान हाई कोर्ट का यह आदेश शहर में नियमों के पालन और सार्वजनिक संपत्ति की सुरक्षा को सुनिश्चित करने की दिशा में महत्वपूर्ण माना जा रहा है। अब यह देखना होगा कि नगर निगम और संबंधित अधिकारियों द्वारा आदेश के अनुसार कितनी तेजी और पारदर्शिता के साथ कार्रवाई की जाती है।