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अलवर में रूपारेल नदी के पुनर्जीवन को लेकर सिंचाई विभाग ने तेज किए कदम, संरक्षण कार्यों में आई तेजी

 

जिले की जीवनदायिनी मानी जाने वाली रूपारेल नदी के पुनर्जीवन और संरक्षण की दिशा में सिंचाई विभाग ने अपने प्रयासों को तेज कर दिया है। लंबे समय से जलस्रोतों के घटते स्तर और नदी के प्राकृतिक प्रवाह में आई बाधाओं को देखते हुए अब प्रशासन ने इसे गंभीरता से लेते हुए कार्य योजना पर तेजी से काम शुरू कर दिया है।

जानकारी के अनुसार, रूपारेल नदी के कई हिस्सों में अतिक्रमण, सिल्ट जमा होने और जल प्रवाह बाधित होने जैसी समस्याएं सामने आई थीं, जिसके कारण नदी का स्वरूप लगातार प्रभावित हो रहा था। इसी को देखते हुए सिंचाई विभाग ने नदी के पुनर्जीवन के लिए विशेष अभियान शुरू किया है।

अधिकारियों के अनुसार, पहले चरण में नदी के प्रवाह क्षेत्र का सर्वे किया जा रहा है, ताकि यह पता लगाया जा सके कि किन स्थानों पर सबसे अधिक अवरोध उत्पन्न हो रहे हैं। इसके बाद अतिक्रमण हटाने, गाद निकालने (डी-सिल्टिंग) और जल प्रवाह को सुचारू बनाने के लिए कार्य किया जाएगा।

इसके साथ ही नदी किनारे वृक्षारोपण और जल संरक्षण संरचनाओं के निर्माण की भी योजना बनाई गई है, ताकि आने वाले समय में नदी के जलस्तर को स्थिर बनाए रखा जा सके। विभाग का मानना है कि केवल सफाई ही नहीं, बल्कि दीर्घकालिक संरक्षण उपाय भी जरूरी हैं।

स्थानीय लोगों और पर्यावरण विशेषज्ञों ने इस पहल का स्वागत किया है। उनका कहना है कि रूपारेल नदी अलवर की पारिस्थितिकी और जल आपूर्ति व्यवस्था के लिए बेहद महत्वपूर्ण है, और इसके पुनर्जीवन से क्षेत्र के भूजल स्तर में भी सुधार हो सकता है।

ग्रामीणों का कहना है कि नदी का स्वरूप पिछले कई वर्षों में काफी बदल गया था, जिससे खेती और पेयजल पर भी असर पड़ रहा था। अब सरकार की ओर से उठाए गए कदमों से उन्हें उम्मीद है कि नदी फिर से अपने पुराने स्वरूप में लौट सकेगी।

सिंचाई विभाग के अधिकारियों ने बताया कि इस परियोजना को चरणबद्ध तरीके से पूरा किया जाएगा और इसमें स्थानीय प्रशासन, पंचायतों और नागरिकों की भी भागीदारी सुनिश्चित की जाएगी।

फिलहाल रूपारेल नदी के पुनर्जीवन अभियान को प्राथमिकता में रखा गया है और उम्मीद जताई जा रही है कि आने वाले समय में इसके सकारात्मक परिणाम देखने को मिलेंगे, जिससे अलवर क्षेत्र में जल संकट को कम करने में मदद मिलेगी।