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इंदिरा गांधी नहर से बदली राजस्थान की तस्वीर! खेती, रोजगार और जीवनशैली में आया ऐतिहासिक बदलाव, वीडियो में खुद देखे परिणाम

 

राजस्थान, जिसे रेगिस्तानों और सूखे भूभाग के लिए जाना जाता है, वहां की किस्मत उस समय बदलने लगी जब देश की सबसे बड़ी नहर परियोजना — इंदिरा गांधी नहर परियोजना (IGNP) — ने अपनी रफ्तार पकड़ी। यह नहर न सिर्फ पानी लाई, बल्कि अपने साथ लाया खेती की क्रांति, रोजगार के नए अवसर, भूमि का पुनर्जनन और ग्रामीण आजीविका में ऐतिहासिक बदलाव।

<a href=https://youtube.com/embed/41v9MArD1fo?autoplay=1&mute=1><img src=https://img.youtube.com/vi/41v9MArD1fo/hqdefault.jpg alt=""><span><div class="youtube_play"></div></span></a>" style="border: 0px; overflow: hidden"" title="Indira Gandhi Nahar | इंदिरा गाँधी नहर कब बनी, कैसे बनी, कुल लम्बाई | Indira Gandhi Canal | गंगनहर" width="695">
इंदिरा गांधी नहर परियोजना का इतिहास
इस परियोजना की शुरुआत 1958 में "राजस्थान नहर परियोजना" के नाम से हुई थी और 1984 में पूर्व प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी के नाम पर इसका नाम बदलकर "इंदिरा गांधी नहर परियोजना" रखा गया। इसका उद्देश्य था — पंजाब के हरिके बैराज से जल लेकर पश्चिमी राजस्थान के रेगिस्तानी क्षेत्रों को सिंचाई योग्य बनाना।लगभग 650 किलोमीटर लंबी यह नहर पंजाब के फिरोजपुर से चलकर राजस्थान के गंगानगर, हनुमानगढ़, बीकानेर, जैसलमेर, बाड़मेर, जोधपुर और नागौर जैसे जिलों को पानी की आपूर्ति करती है।

खेती में आई हरियाली की क्रांति
राजस्थान में वर्षा की भारी कमी और जल स्रोतों के अभाव के कारण यहां की भूमि लंबे समय तक बंजर मानी जाती थी। परंतु इंदिरा गांधी नहर के जरिए सिंचाई की सुविधा मिलने के बाद खेती का नक्शा ही बदल गया।सरसों, गेहूं, बाजरा, चना, जीरा, मूंगफली जैसी फसलें अब बंपर उत्पादन देने लगीं।पहले जहां सिर्फ वर्षा आधारित खेती होती थी, अब दो फसलें या तीन फसलें साल में ली जाने लगीं।राजस्थान का गंगानगर और हनुमानगढ़ जिला आज पंजाब जैसा उपजाऊ क्षेत्र माना जाता है।

रोजगार और आर्थिक बदलाव
खेती में सुधार से ग्रामीणों की आमदनी में बड़ा इजाफा हुआ। पहले जहां लोग सीमित साधनों और बेरोजगारी से जूझते थे, अब उनके पास खेती के साथ-साथ कृषि आधारित उद्योगों में काम करने के अवसर बढ़ गए।खेतों में मजदूरी, ट्रैक्टर-थ्रेशर सेवा, मंडी में रोजगार, फसल कटाई और बिक्री से स्थानीय लोगों को ही नहीं, बाहर से आने वालों को भी काम मिला।महिलाओं ने भी डेयरी, बागवानी और बुनाई जैसे क्षेत्र में अपना योगदान बढ़ाया।

भूमि और भूभाग में आया बदलाव
इंदिरा गांधी नहर से पानी मिलने के बाद न केवल खेती की दिशा बदली, बल्कि रेतीली भूमि उपजाऊ बन गई।जल स्तर में वृद्धि होने से नलकूपों और हैंडपंपों से भी अब पानी आसानी से मिलने लगा है।रेगिस्तान में जहां कभी रेत के टीलों के सिवाय कुछ नहीं था, वहां अब हरियाली, खेत, पगडंडियां और पक्की सड़कें दिखाई देती हैं।यह नहर मरुस्थलीकरण रोकने में एक बड़ी भूमिका निभा रही है।

अजीविका और जीवन स्तर में सुधार
नहर के कारण लोगों की जीवनशैली में भी सकारात्मक परिवर्तन आया है:लोगों की खरीद क्षमता बढ़ी है, बच्चों को अच्छे स्कूलों में भेजा जा रहा है।गांवों में बिजली, पानी, सड़क और स्वास्थ्य सेवाओं का विस्तार हुआ है।कई ग्रामीणों ने मकान बनवाए, ट्रैक्टर खरीदे, छोटे उद्योग शुरू किए।इससे न सिर्फ आजीविका बेहतर हुई, बल्कि सामाजिक सम्मान और आत्मनिर्भरता का भाव भी जागा है।

सामाजिक और पर्यावरणीय पहलू
इंदिरा गांधी नहर ने केवल आर्थिक नहीं, सा
माजिक बदलाव भी लाए हैं।जाति-पांति और वर्गीय भेदभाव में कमी आई है क्योंकि अब हर वर्ग को बराबर लाभ मिल रहा है।हरियाली बढ़ने से पर्यावरण संतुलन भी बेहतर हुआ है।कुछ क्षेत्रों में जलभराव और मिट्टी की लवणता की समस्या भी उभरी है, लेकिन उसे नियंत्रित करने के प्रयास किए जा रहे हैं।