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अस्पतालों की इमरजेंसी पर बढ़ता दबाव: बिना सूचना रेफर मरीजों से बिगड़ रही व्यवस्था, गंभीर मरीजों के इलाज में चुनौती

 

स्वास्थ्य व्यवस्था में एक पुरानी लेकिन लगातार बनी हुई समस्या एक बार फिर सामने आई है। अक्सर देखा जाता है कि एक अस्पताल से दूसरे अस्पताल में गंभीर मरीजों को बिना पूर्व सूचना के रेफर कर दिया जाता है, जिससे पहले से ही दबाव झेल रही इमरजेंसी सेवाओं पर अचानक अतिरिक्त बोझ बढ़ जाता है।

अस्पताल सूत्रों के अनुसार, कई बार क्रिटिकल मरीजों को बिना किसी पूर्व सूचना या उचित रेफरल प्रोटोकॉल के सीधे इमरजेंसी वार्ड में भेज दिया जाता है। ऐसे में संबंधित अस्पताल को अचानक बेड, ऑक्सीजन, वेंटिलेटर और मेडिकल स्टाफ जैसी सुविधाएं तुरंत उपलब्ध करानी पड़ती हैं, जो कई बार मुश्किल हो जाता है।

डॉक्टरों का कहना है कि इमरजेंसी विभाग पहले से ही गंभीर मरीजों की भीड़ से जूझ रहा होता है। ऐसे में बिना तैयारी के आने वाले नए गंभीर मरीज व्यवस्था को और अधिक चुनौतीपूर्ण बना देते हैं। इससे न केवल इलाज में देरी होती है, बल्कि अन्य मरीजों की देखभाल पर भी असर पड़ता है।

विशेषज्ञों के अनुसार, रेफरल सिस्टम में समन्वय की कमी इस समस्या का प्रमुख कारण है। यदि मरीज को भेजने से पहले संबंधित अस्पताल को सूचना दी जाए, तो रिसीविंग हॉस्पिटल समय रहते आवश्यक इंतजाम कर सकता है और मरीज को बेहतर उपचार मिल सकता है।

स्वास्थ्य अधिकारियों का कहना है कि इस समस्या को दूर करने के लिए डिजिटल रेफरल सिस्टम और मजबूत संचार व्यवस्था की जरूरत है, ताकि मरीजों को समय पर और व्यवस्थित इलाज मिल सके।

फिलहाल, यह स्थिति स्वास्थ्य व्यवस्था में बेहतर समन्वय और संसाधन प्रबंधन की आवश्यकता को फिर से उजागर करती है, जिससे भविष्य में गंभीर मरीजों के इलाज में किसी प्रकार की बाधा न आए।