जवाई बांध का इतिहास, 1946 में शुरू हुआ था निर्माण VIDEO जानिए कैसे बना पश्चिमी राजस्थान का सबसे बड़ा बांध
राजस्थान के पाली जिले में स्थित जवाई बांध प्रदेश की महत्वपूर्ण जल परियोजनाओं में शामिल है। जवाई नदी पर बना यह बांध केवल पानी संग्रह करने का बड़ा केंद्र नहीं है, बल्कि पश्चिमी राजस्थान के सामाजिक, कृषि और प्राकृतिक जीवन से भी गहराई से जुड़ा हुआ है। राजस्थान पर्यटन विभाग के अनुसार जवाई बांध पश्चिमी राजस्थान का सबसे बड़ा बांध माना जाता है और आसपास के गांवों तथा जोधपुर शहर के लिए महत्वपूर्ण जल स्रोत है।
बाढ़ की समस्या से निकला बांध बनाने का विचार
जवाई नदी बरसात के समय उफान पर आती थी और इसके पानी से आसपास के क्षेत्रों में बाढ़ की स्थिति पैदा होती थी। इसी समस्या को नियंत्रित करने और पानी का बेहतर इस्तेमाल करने के लिए बांध बनाने की योजना पर विचार किया गया। उपलब्ध ऐतिहासिक विवरणों के अनुसार जवाई बांध परियोजना का निर्माण कार्य वर्ष 1946 में शुरू हुआ और वर्ष 1957 में इसे पूरा किया गया। इस परियोजना को जोधपुर के महाराजा उम्मेद सिंह से जोड़ा जाता है।
जवाई नदी पर बना है बांध
जवाई बांध जवाई नदी पर बनाया गया है। जवाई नदी आगे चलकर लूणी नदी की सहायक नदी के रूप में जुड़ती है। बांध का मुख्य उद्देश्य पानी को संग्रहित करना और उसका इस्तेमाल सिंचाई तथा पेयजल की जरूरतों के लिए करना था। बांध बनने के बाद बरसात के पानी को नियंत्रित तरीके से संग्रहित करने की सुविधा मिली। इससे आसपास के कृषि क्षेत्रों को पानी उपलब्ध कराने में मदद मिली और क्षेत्रीय जल व्यवस्था को मजबूती मिली।
पाली के लिए पानी का बड़ा स्रोत
जवाई बांध आज पाली जिले के लिए महत्वपूर्ण पेयजल स्रोतों में शामिल है। राजस्थान सरकार से संबंधित दस्तावेजों के अनुसार पाली शहर की जलापूर्ति में जवाई बांध की महत्वपूर्ण भूमिका है और बांध से पानी पाइपलाइन के जरिए पाली तक पहुंचाया जाता है। बारिश अच्छी होने पर बांध में पर्याप्त पानी जमा हो जाता है, जिससे पेयजल और सिंचाई दोनों जरूरतों को सहारा मिलता है।
पश्चिमी राजस्थान में अलग पहचान
पश्चिमी राजस्थान के शुष्क क्षेत्र में पानी का महत्व बेहद ज्यादा है। ऐसे इलाके में एक बड़ा जलाशय स्थानीय लोगों, किसानों और आसपास के शहरों के लिए महत्वपूर्ण संसाधन बन जाता है। यही कारण है कि जवाई बांध को केवल एक इंजीनियरिंग परियोजना के रूप में नहीं देखा जाता, बल्कि इसे क्षेत्र की जल व्यवस्था का महत्वपूर्ण आधार माना जाता है।
जवाई का प्राकृतिक संसार भी खास
जवाई बांध के आसपास का क्षेत्र आज वन्यजीवों और पर्यटन के लिए भी प्रसिद्ध है। राजस्थान पर्यटन विभाग के अनुसार यहां सर्दियों में प्रवासी पक्षी आते हैं और क्षेत्र तेंदुओं तथा मगरमच्छों के लिए भी जाना जाता है। जवाई की पहाड़ियों और जलाशय के आसपास तेंदुओं का प्राकृतिक आवास इसे देश के अनोखे वन्यजीव क्षेत्रों में शामिल करता है।
इतिहास और प्रकृति का संगम
करीब सात दशक से अधिक समय से जवाई बांध पश्चिमी राजस्थान की जल व्यवस्था का हिस्सा बना हुआ है। 1946 में शुरू होकर 1957 में पूरा हुआ यह बांध आज पानी, खेती, वन्यजीव और पर्यटन—चारों से जुड़ी पहचान बना चुका है। यही वजह है कि जवाई बांध राजस्थान के इतिहास और आधुनिक जल प्रबंधन की महत्वपूर्ण परियोजनाओं में गिना जाता है।