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भरतपुर जिले का हथौड़ी गांव डिजिटल इंडिया से वंचित, मोबाइल नेटवर्क और इंटरनेट की कमी से ग्रामीण परेशान

 

देश आज डिजिटल इंडिया और 5जी नेटवर्क के विस्तार की दिशा में तेजी से आगे बढ़ रहा है, लेकिन राजस्थान के भरतपुर जिले का एक गांव अभी भी इस बदलाव से कट चुका है। वैर उपखंड के हथौड़ी गांव में आज भी मोबाइल नेटवर्क और इंटरनेट जैसी बुनियादी सुविधाओं का अभाव है, जिससे ग्रामीणों की रोजमर्रा की जिंदगी प्रभावित हो रही है।

गांववासियों का कहना है कि मोबाइल नेटवर्क और इंटरनेट की कमी के कारण वे शिक्षा, स्वास्थ्य और अन्य सरकारी सेवाओं तक समय पर पहुँच नहीं बना पा रहे हैं। बच्चों की ऑनलाइन पढ़ाई और युवाओं की डिजिटल रोजगार संबंधी जानकारी लेने में भी समस्याएँ आ रही हैं। ग्रामीणों ने बताया कि हालात ऐसे हैं कि आपात स्थिति में संपर्क करना भी कठिन हो जाता है।

स्थानीय निवासी राधेश्याम शर्मा ने कहा, "देश में डिजिटल क्रांति चल रही है, लेकिन हमारे गांव में नेटवर्क और इंटरनेट न होने के कारण हम पीछे रह गए हैं। कई बार जरूरी जानकारी और सरकारी योजनाओं का लाभ नहीं ले पा रहे हैं।"

गांववासियों ने प्रशासन और दूरसंचार कंपनियों से अपील की है कि हथौड़ी गांव में मोबाइल नेटवर्क और इंटरनेट सुविधाओं की व्यवस्था जल्द से जल्द की जाए। उनका कहना है कि डिजिटल इंडिया के लक्ष्य को पूरा करने के लिए ग्रामीण क्षेत्रों को भी तकनीकी सुविधाओं से जोड़ना जरूरी है।

विशेषज्ञों का कहना है कि भारत के ग्रामीण क्षेत्रों में डिजिटल और संचार संबंधी असमानता अब भी एक बड़ी चुनौती है। नेटवर्क और इंटरनेट की कमी से न केवल शिक्षा और रोजगार के अवसरों पर असर पड़ता है, बल्कि आपातकालीन सेवाओं और सामाजिक विकास में भी बाधा आती है।

भरतपुर जिले के प्रशासन ने कहा है कि वे ग्रामीण क्षेत्रों में नेटवर्क विस्तार योजना के तहत काम कर रहे हैं, लेकिन हथौड़ी गांव जैसे दूरदराज़ इलाकों तक सेवाओं की पहुंच में समय और संसाधन दोनों की जरूरत है।

इस बीच, ग्रामीण लगातार आवाज उठा रहे हैं कि डिजिटल इंडिया का लाभ सभी तक पहुँचाना आवश्यक है, ताकि वे भी शिक्षा, स्वास्थ्य और सरकारी योजनाओं का पूरा लाभ उठा सकें। ग्रामीणों की मांग है कि सरकार हथौड़ी गांव में जल्द से जल्द मोबाइल टावर और इंटरनेट सेवाओं की स्थापना करे, जिससे उनके जीवन में तकनीकी सुविधा से जुड़ी परेशानियां समाप्त हो सकें।

हथौड़ी गांव की यह स्थिति यह याद दिलाती है कि डिजिटल क्रांति के बीच ग्रामीण और दूरदराज़ क्षेत्रों की डिजिटल समानता अभी भी एक बड़ा मुद्दा है और इसे नजरअंदाज नहीं किया जा सकता।