हनुमान बेनीवाल ने लोकसभा में उठाया किसानों की इनपुट सहायता का मुद्दा
सांसद हनुमान बेनीवाल ने मंगलवार को लोकसभा में किसानों से जुड़े महत्वपूर्ण मुद्दे को उठाया। उन्होंने संतरा, किन्नू जैसी बागवानी फसलों और जीरा, इसबगोल जैसी नकदी फसलों पर आने वाली अधिक लागत के मुकाबले कम मिल रही कृषि इनपुट सहायता पर चिंता जताई। बेनीवाल ने प्रश्नकाल के दौरान सरकार से पूछा कि इन फसलों की खेती में किसानों को गुणवत्तापूर्ण पौध सामग्री, उर्वरक, सिंचाई व्यवस्था और अन्य आवश्यक संसाधनों पर अधिक खर्च करना पड़ता है, लेकिन प्राकृतिक आपदा की स्थिति में मिलने वाली इनपुट सहायता पर्याप्त नहीं है।
हनुमान बेनीवाल ने कहा कि बागवानी और नकदी फसलों की खेती में किसानों का निवेश अन्य फसलों की तुलना में अधिक होता है। पौधों की उच्च गुणवत्ता, सिंचाई के लिए आधुनिक उपकरण और उर्वरक पर खर्च बढ़ जाता है। इसके बावजूद प्राकृतिक आपदाओं जैसे सूखा, बाढ़ या अतिवृष्टि के समय मिलने वाली वित्तीय सहायता सीमित है। उन्होंने यह भी सवाल उठाया कि क्या सरकार इस प्रणाली को अधिक संतुलित बनाने और किसानों की वास्तविक लागत को ध्यान में रखते हुए इनपुट सहायता बढ़ाने पर विचार कर रही है।
सांसद ने अपने प्रश्न में यह भी जोर दिया कि छोटे और सीमांत किसानों के लिए यह समस्या और गंभीर है। अक्सर इनके पास कृषि संसाधनों और पूंजी की कमी होती है, और जब प्राकृतिक आपदा आती है तो नुकसान को पूरी तरह से उठाना उनके लिए लगभग असंभव हो जाता है। हनुमान बेनीवाल ने सरकार से यह भी पूछा कि क्या किसानों के लिए विशेष योजनाओं के तहत इनपुट सहायता का दायरा बढ़ाया जाएगा और सहायता राशि को वास्तविक लागत के अनुरूप संशोधित किया जाएगा।
विशेषज्ञों का कहना है कि बागवानी और नकदी फसलों की खेती में जोखिम अन्य फसलों की तुलना में अधिक होता है। प्राकृतिक आपदाओं के कारण किसानों का निवेश व्यर्थ चला जाता है और उनका आर्थिक संतुलन बिगड़ जाता है। ऐसे में सरकार की इनपुट सहायता योजना का उद्देश्य तभी पूरा हो सकता है जब यह किसानों की वास्तविक लागत और जोखिम के अनुरूप हो।
हनुमान बेनीवाल के सवालों ने लोकसभा में किसानों के हितों और कृषि नीति में सुधार की आवश्यकता को उजागर किया। विपक्ष और कुछ अन्य सांसदों ने भी किसानों को पर्याप्त वित्तीय सहायता और बेहतर योजना उपलब्ध कराने की मांग की। उन्होंने कहा कि कृषि इनपुट सहायता में बढ़ोतरी से किसानों की उत्पादन लागत कम होगी और उन्हें प्राकृतिक आपदाओं के समय आर्थिक सुरक्षा मिलेगी।
राजस्थान और अन्य राज्यों में बागवानी और नकदी फसलों के लिए यह मुद्दा विशेष रूप से संवेदनशील है, क्योंकि इन क्षेत्रों में किसानों की आय का बड़ा हिस्सा इन फसलों पर निर्भर करता है। इनपुट सहायता में सुधार से किसानों को स्थायी और सुरक्षित कृषि प्रबंधन में मदद मिलेगी।
हनुमान बेनीवाल की इस पहल से यह संदेश गया कि कृषि क्षेत्र में वित्तीय नीतियों को अधिक किसान-केंद्रित बनाने की आवश्यकता है। सांसद ने सरकार से आग्रह किया कि वे इनपुट सहायता की राशि और वितरण प्रणाली का पुनर्मूल्यांकन करें ताकि किसानों को उनके वास्तविक खर्च और जोखिम के अनुरूप लाभ मिल सके।