मोबाइल हैक करके अकाउंट से 1.97 लाख रुपए निकाले:2 दिन में 3 ट्रांजेक्शन हुए, मैसेज आने पर ठगी का पता चला
मोबाइल फोन हैक कर बैंक खाते से पैसे निकालने का एक मामला सामने आया है। साइबर ठगों ने कथित तौर पर खाते से दो दिन के भीतर तीन ट्रांजेक्शन के जरिए 1.97 लाख रुपए निकाल लिए। पीड़ित को इसकी जानकारी तब हुई, जब मोबाइल पर बैंक से लेनदेन के मैसेज आए। खाते से बड़ी रकम निकलने का पता चलते ही पीड़ित के होश उड़ गए। इसके बाद मामले की शिकायत संबंधित अधिकारियों से करने की प्रक्रिया शुरू की गई।
इस घटना ने एक बार फिर मोबाइल और डिजिटल बैंकिंग की सुरक्षा को लेकर चिंता बढ़ा दी है। ऑनलाइन लेनदेन की सुविधा ने बैंकिंग को आसान बनाया है, लेकिन साइबर अपराधी अलग-अलग तरीकों से लोगों को निशाना बनाने की कोशिश करते हैं।
दो दिन में तीन बार निकाली रकम
मिली जानकारी के अनुसार, साइबर ठगों ने पीड़ित के बैंक खाते से दो दिन के भीतर तीन बार ट्रांजेक्शन किए। इन लेनदेन के जरिए कुल 1.97 लाख रुपए निकाल लिए गए। पीड़ित को शुरुआत में खाते से रकम निकलने की जानकारी नहीं थी। मोबाइल पर बैंक के संदेश आने के बाद उसे संदेह हुआ और खाते की जांच करने पर ठगी का पता चला।
हालांकि, उपलब्ध जानकारी में यह स्पष्ट नहीं है कि ठगों ने मोबाइल तक पहुंच कैसे बनाई। यह भी सामने आना बाकी है कि खाते से रकम निकालने के लिए किसी फर्जी लिंक, ओटीपी, रिमोट एक्सेस ऐप या अन्य तरीके का इस्तेमाल किया गया था या नहीं।
मोबाइल हैकिंग से कैसे हो सकती है ठगी?
साइबर अपराधी लोगों को फर्जी बैंकिंग लिंक भेजकर, नकली ग्राहक सेवा प्रतिनिधि बनकर या मोबाइल में संदिग्ध ऐप डाउनलोड करवाकर धोखाधड़ी कर सकते हैं। कुछ मामलों में लोग अनजान व्यक्ति के कहने पर स्क्रीन शेयरिंग या रिमोट एक्सेस ऐप इंस्टॉल कर लेते हैं। इससे अपराधियों को मोबाइल की गतिविधियों तक पहुंच मिल सकती है।
हालांकि, हर बैंकिंग धोखाधड़ी मोबाइल हैकिंग के कारण नहीं होती। कई बार बैंकिंग जानकारी साझा करने, सिम कार्ड से जुड़ी धोखाधड़ी या खाते की सुरक्षा में सेंध लगने जैसे कारण भी हो सकते हैं। इस मामले में ठगी का वास्तविक तरीका जांच के बाद ही स्पष्ट होगा।
ठगी होने पर तुरंत क्या करें?
अगर बैंक खाते से बिना अनुमति पैसे निकल जाएं, तो सबसे पहले बैंक को सूचना देकर खाते और संबंधित डिजिटल बैंकिंग सेवाओं को सुरक्षित कराना चाहिए। इसके बाद भारत सरकार के साइबर अपराध हेल्पलाइन नंबर 1930 पर तुरंत शिकायत दर्ज कराएं। ऑनलाइन शिकायत राष्ट्रीय साइबर अपराध रिपोर्टिंग पोर्टल cybercrime.gov.in पर भी की जा सकती है।
पीड़ित को बैंक के संदेश, ट्रांजेक्शन आईडी, खाते का विवरण और अन्य संबंधित सबूत सुरक्षित रखने चाहिए। समय पर शिकायत करने से लेनदेन को रोकने या रकम वापस पाने की संभावना बेहतर हो सकती है, हालांकि इसकी गारंटी नहीं होती।
डिजिटल सुरक्षा में सावधानी जरूरी
मोबाइल पर आने वाले अनजान लिंक पर क्लिक करने से बचें। बैंक के नाम पर फोन करने वाले किसी व्यक्ति को ओटीपी, पिन या पासवर्ड न बताएं। मोबाइल में केवल भरोसेमंद स्रोतों से ऐप डाउनलोड करें और बैंकिंग से जुड़े अलर्ट सक्रिय रखें।
इस मामले में दो दिन के भीतर तीन ट्रांजेक्शन से 1.97 लाख रुपए निकाले जाने की बात सामने आई है। अब जांच में यह पता लगाना महत्वपूर्ण होगा कि ठगी किस तरीके से की गई और रकम किन खातों में ट्रांसफर हुई।