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कैथून में पारंपरिक विभीषण मेले का भव्य उद्घाटन, मदन दिलावर ने हिरण्यकश्यप पुतले का दहन किया

 

 शिक्षा एवं पंचायती राज मंत्री मदन दिलावर ने कोटा जिले के ऐतिहासिक कस्बे कैथून में आयोजित होने वाले पारंपरिक विभीषण मेले का भव्य उद्घाटन किया। धुलेंडी के अवसर पर आयोजित इस मेले में स्थानीय लोगों और दूर-दराज से आए श्रद्धालुओं की भारी भीड़ जुटी, जिसने पूरे इलाके को आस्था और उत्सव की रंगीन छटा से भर दिया।

कैथून में यह मेला पिछले 45 वर्षों से निरंतर आयोजित किया जा रहा है और यह क्षेत्र की सांस्कृतिक और धार्मिक परंपराओं का अहम हिस्सा बन चुका है। मेले की शुरुआत आसपास के मंदिरों से निकलने वाली देव विमान शोभायात्रा के साथ हुई। इस शोभायात्रा में सज-धज कर आए लोग रावण के भाई विभीषण के मंदिर में विधिवत पूजन कर मेला स्थल की ओर रवाना हुए।

मुख्य अतिथि मदन दिलावर ने भी इस अवसर पर श्रद्धालुओं और ग्रामीणों के बीच उत्साहपूर्वक भाग लिया। मेला स्थल पर पहुंचने पर आतिशबाजी और रंग-बिरंगे झांकियों के बीच उन्होंने हिरण्यकश्यप के पुतले का दहन किया। यह दहन समारोह मेला की मुख्य विशेषता माना जाता है और इसे देखने के लिए दूर-दराज से भीड़ उमड़ती है।

स्थानीय लोगों के अनुसार, विभीषण मेला धार्मिक आस्था और सामूहिक मिलन का प्रतीक है। यह मेला केवल धार्मिक दृष्टि से ही महत्वपूर्ण नहीं है, बल्कि यह क्षेत्र की सांस्कृतिक विरासत को संजोने का भी कार्य करता है। मेला के दौरान विभिन्न सांस्कृतिक कार्यक्रम, झांकियां, लोक नृत्य और संगीत प्रदर्शन आयोजित किए जाते हैं, जो ग्रामीण जीवन और राजस्थानी लोक संस्कृति की झलक पेश करते हैं।

मदन दिलावर ने मेले के उद्घाटन के बाद कहा कि इस प्रकार की परंपराएं हमारी सांस्कृतिक विरासत को जीवित रखती हैं। उन्होंने ग्रामीणों से आग्रह किया कि वे अपने बच्चों और युवाओं को इन परंपराओं के महत्व से अवगत कराएं, ताकि आने वाली पीढ़ियां भी इन्हें आगे बढ़ा सकें।

मेला स्थल पर श्रद्धालु भव्य शोभायात्रा और पुतले दहन का आनंद लेने के साथ-साथ स्थानीय व्यंजन और हस्तशिल्प का भी लुत्फ उठाते हैं। इस अवसर पर सुरक्षा और व्यवस्था का विशेष ध्यान रखा गया था। पुलिस और प्रशासनिक अधिकारी मेले में जुटी भीड़ को नियंत्रित करने और किसी भी अप्रिय घटना से बचाने के लिए मुस्तैद रहे।

कैथून का यह विभीषण मेला क्षेत्र की सांस्कृतिक धरोहर और धार्मिक आस्था का जीवंत उदाहरण है। पिछले 45 वर्षों से यह मेला ग्रामीण समाज को एकजुट करने और स्थानीय संस्कृति को संरक्षित रखने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहा है।

इस तरह, धुलेंडी पर आयोजित कैथून मेला न केवल धार्मिक और सांस्कृतिक उत्सव का केंद्र बनता है, बल्कि यह स्थानीय लोगों और दूर-दराज से आए श्रद्धालुओं के लिए सामूहिक आनंद और सामाजिक एकता का अवसर भी प्रदान करता है।