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प्रसूताओं की मौत के मामलों पर सरकार सख्त, बीकानेर सहित मेडिकल कॉलेजों के प्रिंसिपल जयपुर तलब

 

प्रदेशभर में प्रसूताओं की मौत के बढ़ते मामलों को गंभीरता से लेते हुए चिकित्सा एवं स्वास्थ्य मंत्री ने प्रभावित मेडिकल कॉलेजों के अधिकारियों को तलब किया है। इसके तहत बीकानेर सहित संबंधित मेडिकल कॉलेजों के प्रिंसिपल और संबद्ध अस्पतालों के अधीक्षकों (सुपरिटेंडेंट) को सोमवार को जयपुर बुलाया गया है।

स्वास्थ्य भवन में आयोजित होने वाली बैठक में प्रसूता मृत्यु के मामलों की समीक्षा की जाएगी। चिकित्सा मंत्री अधिकारियों से अस्पतालों में उपलब्ध सुविधाओं, उपचार व्यवस्था, लापरवाही के संभावित कारणों और सुधार के लिए उठाए गए कदमों की जानकारी लेंगे।

सूत्रों के अनुसार, प्रदेश के विभिन्न अस्पतालों में सामने आए प्रसूता मृत्यु के मामलों को सरकार ने गंभीरता से लिया है। इसके बाद संबंधित मेडिकल कॉलेजों और अस्पताल प्रशासन से जवाब मांगा गया है। बैठक में यह भी चर्चा होगी कि प्रसूताओं को बेहतर और समय पर उपचार उपलब्ध कराने के लिए क्या कदम उठाए जा सकते हैं।

प्रसूता और नवजात स्वास्थ्य सेवाओं को मजबूत करना सरकार की प्राथमिकताओं में शामिल है। ऐसे में अस्पतालों में विशेषज्ञ चिकित्सकों की उपलब्धता, आपातकालीन सेवाओं की स्थिति, ऑपरेशन थिएटर व्यवस्था और जरूरी संसाधनों की समीक्षा की जाएगी।

बैठक में अधिकारियों से अस्पतालों में होने वाली प्रसव सेवाओं की मॉनिटरिंग व्यवस्था को और मजबूत करने पर भी चर्चा होने की संभावना है। साथ ही यह देखा जाएगा कि किन कारणों से गंभीर मरीजों को समय पर उपचार नहीं मिल पाया।

चिकित्सा विभाग ने पहले भी अस्पताल प्रशासन को प्रसूता देखभाल में किसी भी तरह की लापरवाही नहीं बरतने के निर्देश दिए हैं। अब लगातार सामने आ रहे मामलों के बाद सरकार ने समीक्षा प्रक्रिया तेज कर दी है।

बीकानेर सहित जिन मेडिकल कॉलेजों और अस्पतालों में प्रसूता मृत्यु के मामले सामने आए हैं, वहां के अधिकारियों से विस्तृत रिपोर्ट भी ली जा सकती है। सरकार का उद्देश्य ऐसे मामलों की पुनरावृत्ति रोकना और मातृ मृत्यु दर को कम करना है।

स्वास्थ्य विभाग की इस बैठक को प्रदेश की चिकित्सा व्यवस्था में सुधार की दिशा में अहम कदम माना जा रहा है। अब अधिकारियों के साथ होने वाली समीक्षा के बाद आगे की कार्रवाई तय की जाएगी।