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ज्योति विद्यापीठ महिला विश्वविद्यालय में छात्राओं का प्रदर्शन, फीस बढ़ोतरी और खराब सुविधाओं पर नाराजगी

 

राजस्थान की राजधानी जयपुर के प्रमुख महाविद्यालयों में शामिल ज्योति विद्यापीठ महिला विश्वविद्यालय की साख पर अब सवाल उठने लगे हैं। विश्वविद्यालय में पढ़ रही छात्राओं ने शनिवार को महाविद्यालय परिसर में जोरदार प्रदर्शन किया। उनका गुस्सा मुख्य रूप से बढ़ाई गई फीस और खराब सुविधाओं को लेकर था।

खराब सुविधाओं और स्वास्थ्य संबंधी मुद्दे

छात्राओं ने आरोप लगाया कि महाविद्यालय में उन्हें घटिया भोजन दिया जाता है और पानी की सप्लाई दूषित है। इससे पहले भी कई बार छात्राओं ने इन सुविधाओं को लेकर प्रशासन के खिलाफ शिकायत की थी, लेकिन कोई ठोस कदम नहीं उठाया गया। छात्राओं का कहना है कि ये स्वास्थ्य और सुरक्षा के लिए गंभीर खतरा है।

अचानक बढ़ाई गई फीस

वर्ष 2026 में विश्वविद्यालय ने अचानक फीस में वृद्धि की घोषणा की। छात्राओं ने इसे अन्यायपूर्ण बताया और कहा कि बिना किसी पूर्व सूचना और बजट विवरण के अचानक फीस बढ़ाना उन्हें आर्थिक रूप से प्रभावित कर रहा है। कई छात्राओं के परिवार इस वृद्धि को वहन करने में असमर्थ हैं।

प्रदर्शन और मांगें

शनिवार को छात्राओं ने महाविद्यालय परिसर में प्रदर्शन करते हुए प्रशासन के खिलाफ नारे लगाए और फीस वृद्धि को वापस लेने की मांग की। उन्होंने यह भी कहा कि विश्वविद्यालय में भोजन और पानी की गुणवत्ता में सुधार किया जाए। प्रदर्शन के दौरान कई छात्राओं ने बैनर और पोस्टर लेकर अपनी नाराजगी जताई।

प्रशासन की प्रतिक्रिया

विश्वविद्यालय प्रशासन ने फिलहाल प्रदर्शन पर शांत रहने की अपील की है और बताया कि छात्राओं की शिकायतों की जांच की जा रही है। प्रशासन ने कहा कि फीस वृद्धि के पीछे महाविद्यालय की संचालन लागत और इंफ्रास्ट्रक्चर सुधार के कारण यह कदम उठाया गया। हालांकि, छात्राओं का कहना है कि प्रशासन ने उनके विचार और सुझाव को पर्याप्त महत्व नहीं दिया।

विशेषज्ञों की टिप्पणी

शैक्षिक विशेषज्ञों का मानना है कि इस तरह के प्रदर्शन संस्थानों के लिए चेतावनी हैं। छात्रों की सुविधा, स्वास्थ्य और आर्थिक स्थिति को ध्यान में रखे बिना किसी भी बदलाव या फीस वृद्धि का असर सीधे विश्वविद्यालय की साख पर पड़ता है।

सामाजिक और शिक्षा पर प्रभाव

इस प्रदर्शन ने दिखा दिया है कि छात्राओं में अपने अधिकारों और गुणवत्तापूर्ण शिक्षा के प्रति जागरूकता बढ़ रही है। विशेषज्ञों के अनुसार विश्वविद्यालय को यह कदम उठाना चाहिए कि फीस, स्वास्थ्य और अन्य सुविधाओं में संतुलन बनाया जाए, ताकि छात्रों का विश्वास कायम रहे और संस्थान की प्रतिष्ठा प्रभावित न हो।