शिखर अग्रवाल मामले में गहलोत ने की CBI-ED जांच की मांग, वीडियो में CM भजनलाल से बोले- APО करने से काम नहीं चलेगा
राजस्थान के पूर्व मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने आईएएस अधिकारी शिखर अग्रवाल से जुड़े मामले को लेकर प्रदेश सरकार पर सवाल उठाए हैं। उन्होंने मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा से पूरे प्रकरण की जिम्मेदारी लेने और मामले की जांच केंद्रीय जांच ब्यूरो (CBI) तथा प्रवर्तन निदेशालय (ED) से कराने की मांग की है। गहलोत ने कहा कि केवल अधिकारी को एपीओ (पदस्थापन की प्रतीक्षा में) करने से काम नहीं चलेगा। पूरे मामले की निष्पक्ष जांच होनी चाहिए, ताकि सच्चाई सामने आ सके।गहलोत ने 40 विला एक साथ लिए जाने से जुड़ी खबरों का जिक्र करते हुए इसे चौंकाने वाला बताया। उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री को इस मामले में खुद आगे आकर जवाब देना चाहिए, क्योंकि आरोप मुख्यमंत्री कार्यालय (CMO) तक पहुंच रहे हैं। उनके मुताबिक, सरकार के कार्यकाल के लगभग तीन साल में सामने आया यह मामला गंभीर सवाल खड़े करता है।
मुख्यमंत्री की अध्यक्षता में हुई बैठक पर उठाए सवाल
अशोक गहलोत ने आरोप लगाया कि जिस कंपनी ने शिखर अग्रवाल को विला दिए, उसे मुख्यमंत्री की अध्यक्षता में हुई बैठक में छूट दी गई थी। उन्होंने कहा कि इस कंपनी से जुड़े फैसलों और अधिकारियों की भूमिका की जांच होनी चाहिए।पूर्व मुख्यमंत्री ने दावा किया कि मुख्यमंत्री के अतिरिक्त मुख्य सचिव (ACS) और राजस्थान प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के अध्यक्ष के तौर पर शिखर अग्रवाल से जुड़े फैसले भी जांच के दायरे में आने चाहिए। गहलोत के अनुसार, इन फैसलों को लेकर जो सवाल उठ रहे हैं, उनका जवाब सरकार को देना चाहिए।
IAS अधिकारी के खिलाफ आरोपों की जांच की मांग
यह पूरा विवाद वरिष्ठ IAS अधिकारी शिखर अग्रवाल और उनके परिवार की ओर से एक निजी कंपनी से 40 विला और कॉटेज खरीदे जाने की खबरों के बाद सामने आया है। मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, ये संपत्तियां उदयपुर के बुझड़ा और अलवर के अजबगढ़ में खरीदी गई थीं। आरोप है कि संपत्तियां बाजार मूल्य से कम कीमत पर खरीदी गईं और बाद में इन्हें उसी कंपनी को लीज पर दे दिया गया।
मामले में राजस्थान सरकार ने 28 अक्टूबर को शिखर अग्रवाल को एपीओ कर दिया था। इसके बाद 30 अक्टूबर को राज्य सरकार ने भ्रष्टाचार निरोधक ब्यूरो (ACB) को उनके खिलाफ विस्तृत जांच की मंजूरी भी दी। एसीबी की शुरुआती जांच में निजी कंपनी को कथित लाभ पहुंचाने और संपत्तियों की खरीद में अनियमितताओं के आरोपों की पड़ताल की जा रही है।
गहलोत बोले- CBI और ED से दूध का दूध, पानी का पानी होगा
गहलोत ने कहा कि IAS अधिकारियों की कंट्रोलिंग अथॉरिटी केंद्र सरकार होती है। ऐसे में इस मामले को CBI और ED को सौंपा जाना चाहिए। उन्होंने कहा कि केंद्रीय एजेंसियों की जांच से पूरे मामले की सच्चाई सामने आ सकेगी।उन्होंने मुख्यमंत्री से सवाल किया कि जब उनकी अध्यक्षता में हुई बैठक में संबंधित कंपनी को रियायतें दी गईं तो इसकी जिम्मेदारी कौन लेगा। गहलोत ने कहा कि केवल एपीओ करने से जिम्मेदारी खत्म नहीं होती। मुख्यमंत्री को सामने आकर पूरे मामले पर अपनी स्थिति स्पष्ट करनी चाहिए।फिलहाल शिखर अग्रवाल से जुड़े संपत्ति लेनदेन और कंपनी को दी गई कथित रियायतों की जांच जारी है। गहलोत की CBI-ED जांच की मांग के बीच अब इस मामले पर राज्य सरकार और संबंधित अधिकारियों के जवाब पर नजर रहेगी। आरोपों की अंतिम पुष्टि जांच और उपलब्ध दस्तावेजों के आधार पर ही होगी।