लालसोट में गणगौर महोत्सव की धूम: शाही सवारी और 276 साल पुराना हेला ख्याल संगीत दंगल बना आकर्षण का केंद्र
राजस्थान के दौसा जिले के लालसोट में गणगौर महोत्सव को इस बार भी पूरे उत्साह और पारंपरिक रंग-रूप के साथ धूमधाम से मनाया गया। इस अवसर पर शहर की सड़कों पर निकली शाही सवारी और 276 साल पुराने हेला ख्याल संगीत दंगल ने पूरे माहौल को खास और यादगार बना दिया।
गणगौर महोत्सव के मौके पर लालसोट में हजारों की संख्या में श्रद्धालु और स्थानीय लोग उमड़े। इस दौरान लोक संस्कृति, परंपरा और आस्था का अद्भुत संगम देखने को मिला। पारंपरिक वेशभूषा में सजे-धजे लोग इस आयोजन का हिस्सा बने और पूरे शहर में उत्सव जैसा माहौल रहा।
महोत्सव का मुख्य आकर्षण शाही सवारी रही, जिसमें पारंपरिक झांकियों और सुसज्जित रथों के साथ गणगौर माता की भव्य झांकी निकाली गई। सवारी के दौरान स्थानीय कलाकारों ने पारंपरिक नृत्य और संगीत प्रस्तुत कर दर्शकों का मन मोह लिया।
इसके अलावा, 276 साल पुराना हेला ख्याल संगीत दंगल इस आयोजन का सबसे खास और ऐतिहासिक हिस्सा रहा। इस पारंपरिक लोक संगीत प्रतियोगिता में कलाकारों ने अपनी गायकी और कला का शानदार प्रदर्शन किया। यह दंगल राजस्थान की समृद्ध लोक परंपरा को जीवंत करता है और पीढ़ियों से इसे संजोकर रखा गया है।
कार्यक्रम में शामिल लोगों ने बताया कि इस तरह के आयोजन न केवल हमारी सांस्कृतिक विरासत को जीवित रखते हैं, बल्कि नई पीढ़ी को भी अपनी परंपराओं से जोड़ते हैं। पूरे आयोजन के दौरान सुरक्षा व्यवस्था भी चाक-चौबंद रही, जिससे श्रद्धालुओं को किसी प्रकार की परेशानी नहीं हुई।
लालसोट में आयोजित यह गणगौर महोत्सव न केवल धार्मिक आस्था का प्रतीक बना, बल्कि राजस्थान की लोक संस्कृति, संगीत और परंपराओं को भी मजबूती से प्रदर्शित करता नजर आया। हजारों लोगों की मौजूदगी ने इस आयोजन को और भी भव्य और यादगार बना दिया।
इस प्रकार, गणगौर महोत्सव के इस आयोजन ने एक बार फिर यह साबित किया कि राजस्थान की लोक संस्कृति आज भी उतनी ही जीवंत और आकर्षक है, जितनी सदियों पहले थी।