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दूध बेचने वाले युवक से खूंखार डाकू बनने तक, वीडियो में देंखे 125 मामलों का आरोपी जगन गुर्जर का अजमेर जेल में हुआ अंत 

 

 

कभी साधारण जीवन जीने वाला जगन गुर्जर बाद में राजस्थान, मध्य प्रदेश और उत्तर प्रदेश की पुलिस के लिए सबसे बड़ी चुनौतियों में से एक बन गया। उसके पिता मंदिर में पूजा-पाठ कराते थे, जबकि जगन युवावस्था में दूध बेचने का काम करता था। लेकिन अपराध की दुनिया में कदम रखने के बाद उसकी पहचान एक कुख्यात डाकू के रूप में बनी। बताया जाता है कि 1994 में पहली बार पुलिस रिकॉर्ड में जगन गुर्जर का नाम एक एफआईआर में दर्ज हुआ। इसके बाद उसने अपराध की राह नहीं छोड़ी और धीरे-धीरे हत्या, डकैती, अपहरण, रंगदारी और लूट जैसी गंभीर वारदातों में शामिल होता गया।

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पुलिस रिकॉर्ड के अनुसार, जगन गुर्जर पर 125 से अधिक आपराधिक मामले दर्ज थे। इनमें आधे से ज्यादा मामले हत्या, हत्या के प्रयास, अपहरण, डकैती और लूट जैसे संगीन अपराधों से जुड़े थे। करीब एक दशक तक उसका नाम राजस्थान, उत्तर प्रदेश और मध्य प्रदेश के सीमावर्ती इलाकों में भय का पर्याय बना रहा।जगन गुर्जर का खौफ इतना बढ़ गया था कि उसके खिलाफ सख्त कार्रवाई की मांग देश की संसद तक पहुंची। उसे देश का पहला ऐसा डाकू माना जाता है, जिसके एनकाउंटर की मांग संसद में उठाई गई थी।

अपने अपराधों के दौरान उसने कई बार प्रशासन और नेताओं को भी खुली चुनौती दी। एक समय उसने राजस्थान की तत्कालीन मुख्यमंत्री वसुंधरा राजे के धौलपुर स्थित महल को उड़ाने तक की धमकी दी थी, जिसके बाद सुरक्षा एजेंसियां अलर्ट हो गई थीं।हालांकि, समय के साथ जगन की गतिविधियों में बदलाव भी देखने को मिला। गंभीर अपराधों के अलावा बाद के वर्षों में वह छोटी-छोटी बातों पर भी लोगों से मारपीट करने लगा। तीन रुपये के विवाद या पंचर ठीक से नहीं बनाने जैसी मामूली बातों पर भी उसके खिलाफ मारपीट के मामले दर्ज हुए। इसके चलते उसके खिलाफ छोटे अपराधों के मुकदमों की संख्या भी बढ़ती गई।

29 जून को अजमेर जेल में उसकी मौत के साथ ही तीन दशक से अधिक समय तक अपराध की दुनिया में सक्रिय रहे एक कुख्यात डाकू का अंत हो गया। हालांकि, उसकी मौत किन परिस्थितियों में हुई, इसकी जांच और कानूनी प्रक्रिया अपने स्तर पर जारी है।जगन गुर्जर की कहानी इस बात का उदाहरण है कि कैसे एक सामान्य पृष्ठभूमि से निकला व्यक्ति अपराध के रास्ते पर चलते हुए कानून के लिए बड़ी चुनौती बन गया। 32 वर्षों तक अपराध जगत में सक्रिय रहने के बाद उसकी कहानी का अंत जरूर हो गया, लेकिन उसका नाम राजस्थान के सबसे चर्चित डकैतों में लंबे समय तक याद किया जाएगा।