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सुप्रीम कोर्ट जज के आरोपों पर पूर्व जस्टिस संजीव शर्मा का जवाब, बोले- पेशेवर ईर्ष्या हो सकती है वजह

 

राजस्थान हाईकोर्ट के पूर्व कार्यवाहक मुख्य न्यायाधीश जस्टिस संजीव प्रकाश शर्मा ने सुप्रीम कोर्ट के जस्टिस संदीप मेहता की ओर से लगाए गए आरोपों पर पहली बार विस्तार से अपनी बात रखी है। जस्टिस शर्मा ने आरोपों को खारिज करते हुए कहा कि उनके खिलाफ लगाए गए आरोपों के पीछे पेशेवर ईर्ष्या या व्यक्तिगत द्वेष की संभावना हो सकती है। उन्होंने अपने कार्यकाल के दौरान रोस्टर, मुकदमों के आवंटन, न्यायिक अधिकारियों के तबादलों और प्रशासनिक फैसलों को लेकर भी सफाई दी।

जस्टिस शर्मा ने कहा कि जस्टिस मेहता को राजस्थान हाईकोर्ट के प्रशासनिक और आंतरिक कामकाज में इस तरह दखल देने का अधिकार नहीं था। उनके मुताबिक अगर किसी फैसले या प्रशासनिक व्यवस्था को लेकर कोई शिकायत थी तो उसे निर्धारित संस्थागत प्रक्रिया के तहत मुख्य न्यायाधीश या संबंधित संवैधानिक स्तर पर उठाया जाना चाहिए था। उन्होंने बताया कि उन्होंने जस्टिस मेहता की ओर से भेजे गए पत्रों का जवाब भी दिया था।

जस्टिस मेहता ने लगाए थे गंभीर आरोप

दरअसल, अगस्त 2026 में जस्टिस संदीप मेहता ने तत्कालीन कार्यवाहक मुख्य न्यायाधीश संजीव प्रकाश शर्मा को लेकर CJI को कई पत्र लिखे थे। इन पत्रों में उन्होंने कथित तौर पर प्रशासनिक शक्तियों के दुरुपयोग, मामलों की लिस्टिंग में हस्तक्षेप, रोस्टर में बदलाव और न्यायिक अधिकारियों के तबादलों से जुड़े गंभीर सवाल उठाए थे। बाद में 30 अगस्त को लिखे एक और पत्र में उन्होंने आंतरिक न्यायिक जांच में कथित हस्तक्षेप और गोपनीयता के उल्लंघन के आरोप भी लगाए।

जस्टिस शर्मा ने इन आरोपों को निराधार बताया है। उनका कहना है कि काम करने के तरीके में अंतर को गलत आचरण नहीं माना जा सकता। उन्होंने अपने प्रशासनिक कार्यकाल का बचाव करते हुए कहा कि उनके फैसले और कामकाज निर्धारित अधिकार क्षेत्र के तहत थे।

रोस्टर में बदलाव पर क्या बोले

रोस्टर और मामलों के आवंटन को लेकर जस्टिस शर्मा ने कहा कि मुख्य न्यायाधीश के पास प्रशासनिक अधिकार होते हैं और जरूरत के अनुसार मामलों का आवंटन किया जाता है। उनके मुताबिक मुकदमों की लंबित संख्या, वकीलों की समस्याओं और प्रशासनिक जरूरतों जैसे पहलुओं को ध्यान में रखकर रोस्टर में बदलाव किए जा सकते हैं।

तबादलों के आरोप पर भी दी सफाई

न्यायिक अधिकारियों के तबादलों को लेकर लगाए गए आरोपों पर जस्टिस शर्मा ने कहा कि बड़ी संख्या में तबादले प्रशासनिक प्रक्रिया का हिस्सा होते हैं। उन्होंने बताया कि करीब 800 तबादले किए गए और ऐसे फैसलों में अधिकारी के किसी स्थान पर रहने की अवधि समेत कई पहलुओं को देखा जाता है। उनके अनुसार तबादलों की प्रक्रिया में निर्धारित प्रशासनिक व्यवस्था का पालन किया जाता है।

‘पेशेवर ईर्ष्या’ का किया जिक्र

जब जस्टिस शर्मा से पूछा गया कि जस्टिस मेहता ने उनके खिलाफ आरोप क्यों लगाए, तो उन्होंने कहा कि इसकी वास्तविक वजह वह नहीं जानते। हालांकि उन्होंने इसकी संभावना पेशेवर ईर्ष्या से जोड़ी। उन्होंने यह भी कहा कि न्यायाधीशों के बीच मतभेदों को सार्वजनिक मंचों पर लाने के बजाय संस्थागत प्रक्रिया के जरिए सुलझाया जाना चाहिए।

इस पूरे विवाद पर CJI सूर्यकांत पहले ही कह चुके हैं कि किसी मौजूदा जज के खिलाफ लगाए गए आरोपों पर सार्वजनिक दावों के आधार पर निष्कर्ष नहीं निकाला जा सकता। उन्होंने कहा था कि ऐसे मामलों को स्थापित संस्थागत प्रक्रिया के तहत ही देखा जाना चाहिए और संबंधित जज को अपना पक्ष रखने का अवसर मिलना जरूरी है।

इस बीच सुप्रीम कोर्ट कॉलेजियम ने राजस्थान हाईकोर्ट के लिए नए मुख्य न्यायाधीश की नियुक्ति की सिफारिश की थी। जस्टिस शर्मा अब सेवानिवृत्त हो चुके हैं। उनके ताजा बयान के बाद यह विवाद एक बार फिर चर्चा में है, लेकिन लगाए गए आरोपों और उनके जवाबों पर अंतिम निष्कर्ष संबंधित संस्थागत प्रक्रिया के आधार पर ही तय होगा।