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राजस्थान की चिकित्सा व्यवस्था पर उठे सवाल, पूर्व चिकित्सा मंत्री डॉ. रघु शर्मा ने सरकार को घेरा

 

राजस्थान की स्वास्थ्य सेवाओं और चिकित्सा व्यवस्था को लेकर एक बार फिर सियासी बयानबाज़ी तेज हो गई है। पूर्व चिकित्सा मंत्री डॉ. रघु शर्मा ने राज्य सरकार की कार्यशैली पर गंभीर सवाल खड़े किए हैं। गुरुवार को आयोजित एक प्रेस कॉन्फ्रेंस में उन्होंने कहा कि वर्तमान सरकार का आधा कार्यकाल बीत चुका है, लेकिन प्रदेश की स्वास्थ्य व्यवस्था अब भी अपेक्षित सुधार से कोसों दूर दिखाई दे रही है।

प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान डॉ. रघु शर्मा ने आरोप लगाया कि सरकार ने स्वास्थ्य क्षेत्र को वह प्राथमिकता नहीं दी, जिसकी जनता को उम्मीद थी। उन्होंने कहा कि अस्पतालों में बुनियादी सुविधाओं की कमी, डॉक्टरों और पैरामेडिकल स्टाफ की कमी तथा ग्रामीण क्षेत्रों में चिकित्सा सेवाओं की बदहाल स्थिति अब भी गंभीर चिंता का विषय बनी हुई है।

उन्होंने यह भी दावा किया कि कई सरकारी अस्पतालों में मरीजों को समय पर इलाज नहीं मिल पा रहा है, जिससे आम जनता को भारी परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है। पूर्व मंत्री के अनुसार, स्वास्थ्य योजनाओं के क्रियान्वयन में भी सुस्ती देखने को मिल रही है, जिसके कारण योजनाओं का लाभ अंतिम व्यक्ति तक पूरी तरह नहीं पहुंच पा रहा है।

डॉ. रघु शर्मा ने आगे कहा कि चिकित्सा व्यवस्था को मजबूत करने के लिए ठोस नीति और जमीनी स्तर पर सुधार की आवश्यकता है, लेकिन सरकार की ओर से इस दिशा में अपेक्षित कदम नहीं उठाए गए हैं। उन्होंने यह भी सवाल उठाया कि स्वास्थ्य बजट और संसाधनों के बावजूद स्थिति में सुधार क्यों नहीं हो रहा है।

उन्होंने ग्रामीण स्वास्थ्य सेवाओं की स्थिति पर विशेष चिंता जताते हुए कहा कि दूर-दराज के इलाकों में प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्रों की हालत बेहद कमजोर है। कई जगहों पर आवश्यक दवाओं की उपलब्धता भी सुनिश्चित नहीं हो पा रही है, जिससे मरीजों को निजी अस्पतालों की ओर रुख करना पड़ता है और उन पर आर्थिक बोझ बढ़ता है।

इस प्रेस कॉन्फ्रेंस के बाद राज्य की राजनीति में हलचल तेज हो गई है। जहां विपक्ष सरकार को घेरने में जुटा है, वहीं सरकार की ओर से भी इन आरोपों पर जवाब आने की संभावना जताई जा रही है। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि आने वाले दिनों में स्वास्थ्य व्यवस्था को लेकर यह मुद्दा और अधिक गर्मा सकता है।

हालांकि, सरकार की ओर से अभी तक इस बयान पर कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है। लेकिन माना जा रहा है कि स्वास्थ्य विभाग जल्द ही इन आरोपों पर अपना पक्ष रख सकता है।

इस पूरे मामले ने एक बार फिर राजस्थान की चिकित्सा व्यवस्था को लेकर बहस छेड़ दी है, और आम जनता के बीच स्वास्थ्य सेवाओं की स्थिति को लेकर चिंता बढ़ा दी है।