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पूर्व राजपरिवार की जमीनों के फर्जी डॉक्यूमेंट बनाने का आरोप, पूर्व महाराजा गजसिंह की पावर ऑफ अटॉर्नी के गलत इस्तेमाल का मामला दर्ज

 

जोधपुर में पूर्व राजपरिवार की जमीनों से जुड़े दस्तावेजों में कथित फर्जीवाड़े का मामला सामने आया है। आरोप है कि पूर्व महाराजा गजसिंह की पावर ऑफ अटॉर्नी का गलत इस्तेमाल कर उनकी संपत्तियों से संबंधित फर्जी दस्तावेज तैयार किए गए। मामले में पुलिस ने शिकायत के आधार पर केस दर्ज कर जांच शुरू कर दी है।

बताया जा रहा है कि विवाद पूर्व राजपरिवार की जमीनों और उनसे जुड़े दस्तावेजों को लेकर है। शिकायत में आरोप लगाया गया है कि पावर ऑफ अटॉर्नी का दुरुपयोग करते हुए ऐसे दस्तावेज तैयार किए गए, जिनका इस्तेमाल संपत्ति से जुड़े अधिकार या लेन-देन के लिए किया जा सकता था।

पावर ऑफ अटॉर्नी के दुरुपयोग का आरोप

शिकायत के अनुसार, पूर्व महाराजा गजसिंह की ओर से जारी पावर ऑफ अटॉर्नी का कथित तौर पर गलत तरीके से इस्तेमाल किया गया। आरोप है कि इसी आधार पर जमीनों से जुड़े दस्तावेज तैयार किए गए और उन्हें वास्तविक दिखाने का प्रयास किया गया।

मामले की गंभीरता को देखते हुए पुलिस अब यह पता लगाने में जुटी है कि पावर ऑफ अटॉर्नी किस उद्देश्य से जारी की गई थी और बाद में उसका इस्तेमाल किन लोगों ने किस तरह किया।

जमीनों के दस्तावेजों की जांच

पुलिस ने मामले में संबंधित जमीनों के रिकॉर्ड और दस्तावेजों की जांच शुरू कर दी है। दस्तावेज कब और किसके नाम से तैयार किए गए, उनमें किस तरह की जानकारी दर्ज है और उनके आधार पर कोई लेन-देन हुआ या नहीं, इसकी भी पड़ताल की जा रही है।

जांच में राजस्व रिकॉर्ड, पावर ऑफ अटॉर्नी और संबंधित दस्तावेजों का मिलान किया जा सकता है। पुलिस यह भी पता लगाएगी कि कथित फर्जी दस्तावेज तैयार करने और इस्तेमाल करने में कौन-कौन लोग शामिल थे।

मामला दर्ज, आरोपियों की भूमिका की जांच

शिकायत के आधार पर पुलिस ने मामला दर्ज कर लिया है। अब जांच अधिकारी शिकायत में लगाए गए आरोपों की पुष्टि के लिए साक्ष्य जुटा रहे हैं।

पुलिस अधिकारियों के अनुसार, दस्तावेजों की जांच और संबंधित लोगों से पूछताछ के बाद मामले की वास्तविक स्थिति सामने आएगी। यदि जांच में फर्जी दस्तावेज बनाने या पावर ऑफ अटॉर्नी के दुरुपयोग की पुष्टि होती है तो संबंधित लोगों के खिलाफ कानूनी कार्रवाई की जाएगी।

संपत्ति विवाद में आगे की जांच अहम

पूर्व राजपरिवार की जमीनों से जुड़ा मामला होने के कारण इसकी जांच महत्वपूर्ण मानी जा रही है। पुलिस अब यह पता लगाने में जुटी है कि कथित फर्जी दस्तावेजों का इस्तेमाल केवल रिकॉर्ड तैयार करने तक सीमित था या इनके जरिए जमीन पर किसी तरह का अधिकार जताने अथवा लेन-देन का प्रयास भी किया गया।

फिलहाल मामले में जांच जारी है और पुलिस दस्तावेजी साक्ष्यों के आधार पर आगे की कार्रवाई करेगी।