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मोहनगढ़ में किसानों ने तीन सूत्रीय मांगों को लेकर पंचायत, उग्र आंदोलन की चेतावनी

 

जिले के मोहनगढ़ क्षेत्र में किसानों ने अपनी तीन सूत्रीय मांगों को लेकर एक पंचायत का आयोजन किया। इस मौके पर बड़ी संख्या में किसान पहुंचे और सरकार तथा प्रशासन के खिलाफ अपना रोष व्यक्त किया। पंचायत का आयोजन अमर शहीद राजेंद्र सिंह स्मारक स्थल पर किया गया, जहाँ सैकड़ों की संख्या में किसान मौजूद थे।

पंचायत में किसानों ने आगामी रणनीति पर चर्चा की और जिला कलेक्टर के नाम थाना प्रभारी को ज्ञापन सौंपा। ज्ञापन में किसानों की मांगों का विवरण स्पष्ट रूप से दर्ज किया गया और उन्हें जल्द पूरा करने की अपील की गई। किसानों का कहना है कि यदि उनकी मांगों को समय पर नहीं माना गया, तो 22 जनवरी को उग्र आंदोलन किया जाएगा।

इस मौके पर किसान नेताओं ने बताया कि उनकी तीन प्रमुख मांगें हैं, जिनमें कृषि संबंधी सहायता, सिंचाई सुविधाओं का सुधार और फसल का उचित मूल्य सुनिश्चित करना शामिल है। उन्होंने कहा कि पिछले कई महीनों से यह मुद्दा प्रशासन के सामने रखा गया, लेकिन अब तक कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई है।

स्थानीय किसान नेताओं ने कहा कि पंचायत का उद्देश्य न केवल अपनी मांगों को प्रशासन तक पहुँचाना है, बल्कि किसानों के बीच एकजुटता और सामूहिक आवाज को मजबूत करना भी है। उन्होंने चेतावनी दी कि अगर उनकी समस्याओं का समाधान नहीं हुआ, तो आंदोलन को और भारी स्वरूप दिया जाएगा।

पंचायत में शामिल किसानों ने जोर देकर कहा कि 22 जनवरी को आयोजित होने वाले आंदोलन में जिला प्रशासन, सरकारी कार्यालय और मुख्य सड़कों पर व्यापक प्रदर्शन किया जाएगा। उन्होंने यह भी कहा कि यदि प्रशासन ने उनकी मांगों को गंभीरता से नहीं लिया, तो आंदोलन को लंबा और तीव्र स्वरूप दिया जाएगा।

जिला प्रशासन ने कहा कि किसानों के ज्ञापन को गंभीरता से लिया गया है और जल्द ही इस मामले में समाधान के लिए बैठक आयोजित की जाएगी। प्रशासन ने आश्वासन दिया कि किसानों की समस्याओं का समाधान निकालने के लिए सभी आवश्यक कदम उठाए जाएंगे।

विशेषज्ञों का कहना है कि ग्रामीण और कृषि क्षेत्रों में इस प्रकार की सामूहिक पंचायत और आंदोलन किसानों की वास्तविक समस्याओं को उजागर करने का एक महत्वपूर्ण माध्यम हैं। हालांकि, प्रशासन और किसानों के बीच संवाद स्थापित होना जरूरी है ताकि आंदोलन और संघर्ष से बचा जा सके।

मोहनगढ़ की पंचायत ने यह भी स्पष्ट कर दिया कि किसान अपनी मांगों को लेकर सजग और संगठित हैं। उनके प्रयासों का उद्देश्य न केवल अपने हक की लड़ाई लड़ना है, बल्कि पूरे क्षेत्र में कृषि और किसानों की स्थिति को सुधारना भी है।

इस प्रकार, मोहनगढ़ की पंचायत और 22 जनवरी को संभावित आंदोलन ने प्रशासन और किसानों दोनों के लिए संदेश दिया है कि समस्या का त्वरित समाधान न होने पर स्थिति गंभीर हो सकती है। जिला प्रशासन अब इस मामले पर विशेष नजर बनाए हुए है और आंदोलन की संभावित तैयारियों पर नजर रख रहा है।