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नोहर फीडर नहर की बदहाल स्थिति पर किसानों का रोष, महापंचायत का ऐलान

 

जिले के किसानों में नोहर फीडर नहर की खराब स्थिति को लेकर गहरा आक्रोश है। किसानों का कहना है कि नहर की मरम्मत और नवनिर्माण के अभाव में खेतों तक पूरा सिंचाई पानी नहीं पहुंच पा रहा है, जिससे फसल और किसानों की आमदनी पर गंभीर असर पड़ रहा है। इस मुद्दे को लेकर 23 जनवरी, शुक्रवार को भगवान हैड पर किसानों की विशाल महापंचायत आयोजित की जाएगी।

महापंचायत से पहले गुरुवार को किसानों ने भगवान हैड पर पत्रकार वार्ता कर आंदोलन की पूरी रूपरेखा और उनकी मांगें सामने रखी। किसानों ने स्पष्ट किया कि नहर की स्थिति इतनी गंभीर है कि सिंचाई का पानी खेतों तक नहीं पहुँच पा रहा, जिससे कृषि उत्पादन घट रहा है और किसानों की परेशानियां बढ़ रही हैं।

किसानों ने कहा कि यह केवल एक स्थानीय समस्या नहीं है, बल्कि नहर के सुधार में विलंब क्षेत्र के लाखों किसानों की आजीविका पर असर डाल रहा है। उन्होंने सरकार और संबंधित विभाग से नहर के नवनिर्माण और जल वितरण प्रणाली को सुधारने की मांग की। किसानों का कहना है कि यदि उनकी मांगें नहीं मानी गईं तो वे महापंचायत के बाद बड़े पैमाने पर आंदोलन करने के लिए तैयार हैं।

किसान नेता ने पत्रकार वार्ता में बताया कि महापंचायत में सैकड़ों किसानों के शामिल होने की संभावना है। वे न केवल नहर की मरम्मत, बल्कि खेतों तक पूर्ण सिंचाई पानी पहुंचाने की गारंटी भी चाहते हैं। उनका कहना है कि इस मुद्दे को लेकर अब तक कई बार विभाग और प्रशासन से बातचीत हुई है, लेकिन कोई ठोस कदम नहीं उठाया गया।

विशेषज्ञों का कहना है कि नहरों की स्थिति और जल वितरण प्रणाली का ठीक तरह से संचालन कृषि उत्पादन और ग्रामीण अर्थव्यवस्था के लिए बेहद महत्वपूर्ण है। उन्होंने चेतावनी दी कि यदि समय पर सुधार नहीं किया गया, तो किसानों की फसल और आमदनी पर गंभीर असर पड़ सकता है, जिससे क्षेत्र में सामाजिक और आर्थिक असंतोष बढ़ सकता है।

अधिकारियों ने कहा कि नहर की स्थिति का अवलोकन किया जा रहा है और जल्द ही मरम्मत और सुधार कार्य शुरू करने की प्रक्रिया में हैं। हालांकि, किसानों का कहना है कि शुरुआती कदम काफी नहीं हैं, उन्हें पूरी नहर प्रणाली के नवनिर्माण और सिंचाई के नियमित प्रवाह की गारंटी चाहिए।

महापंचायत को लेकर प्रशासन भी सतर्क है। पुलिस और स्थानीय प्रशासन ने सुरक्षा और शांति व्यवस्था को लेकर कदम उठाए हैं। उन्होंने कहा कि किसानों के आंदोलन का समर्थन किया जा सकता है, लेकिन शांतिपूर्ण तरीके से आवाज उठाई जाए।

हनुमानगढ़ जिले के नोहर फीडर नहर का मामला यह स्पष्ट करता है कि किसानों की समस्याओं पर समय पर ध्यान न देने से गंभीर आंदोलन और असंतोष पैदा हो सकता है। 23 जनवरी को होने वाली महापंचायत इस दिशा में एक महत्वपूर्ण घटना मानी जा रही है, जो क्षेत्रीय किसानों की मांगों को सरकार और प्रशासन तक पहुंचाने का माध्यम होगी।

किसानों और स्थानीय लोगों की मांग है कि नहर की मरम्मत जल्द से जल्द की जाए, ताकि सिंचाई पानी की कमी और फसल नुकसान जैसी समस्याओं का समाधान हो और क्षेत्र में कृषि गतिविधियां सामान्य रूप से संचालित हो सकें।