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खेड़ली में पूर्वी राजस्थान क्षत्रिय महासमागम: EWS आरक्षण बना मुख्य चुनावी मुद्दा

 

आगामी पंचायतराज और स्थानीय निकाय चुनावों से पहले खेड़ली में आयोजित पूर्वी राजस्थान क्षत्रिय महासमागम में EWS (आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग) आरक्षण को मुख्य चुनावी मुद्दा घोषित किया गया। महासमागम में शक्ति सिंह बांदीकुई ने जोर देकर कहा कि EWS आरक्षण को 20 प्रतिशत तक बढ़ाया जाए और इसे पंचायत चुनावों में लागू किया जाए।

महासमागम में विभिन्न क्षत्रिय संगठनों के वरिष्ठ नेता और प्रतिनिधि मौजूद रहे। उन्होंने कहा कि आरक्षण को बढ़ाने और इसे चुनावों में लागू करने की मांग समाज की व्यापक आकांक्षाओं को दर्शाती है। सभा में उपस्थित लोगों ने इसे आगामी चुनावों में निर्णायक मुद्दा बनाने की घोषणा की।

शक्ति सिंह बांदीकुई ने अपने संबोधन में कहा, “EWS आरक्षण न केवल समाज के कमजोर वर्गों को अवसर देगा, बल्कि ग्रामीण और स्थानीय स्तर पर प्रतिनिधित्व सुनिश्चित करेगा। यदि सरकार ने इस मांग पर ध्यान नहीं दिया, तो समाज को अपने अधिकारों के लिए मजबूती से आवाज उठानी होगी।”

संगठन ने आगे चेतावनी दी कि यदि राज्य सरकार ने पंचायत चुनावों में EWS आरक्षण को लागू नहीं किया, तो समाज व्यापक आंदोलन की योजना बना सकता है। महासमागम में उपस्थित नेताओं ने इसे आगामी चुनावों में क्षत्रिय समाज की सक्रिय भागीदारी का संकेत बताया।

विशेषज्ञों का कहना है कि यह घोषणा न केवल राजनीतिक दृष्टि से महत्वपूर्ण है, बल्कि सामाजिक और आर्थिक दृष्टि से भी राज्य में सशक्त प्रतिनिधित्व और समान अवसर सुनिश्चित करने में प्रभाव डाल सकती है। उन्होंने कहा कि इस तरह के मुद्दे चुनावी रणनीति और वोट बैंक को प्रभावित करने की क्षमता रखते हैं।

स्थानीय नागरिकों और समाज के युवाओं ने भी इस घोषणा का स्वागत किया। उनका कहना है कि EWS आरक्षण बढ़ाने की मांग समाज के विकास और समान अवसरों की दिशा में एक सकारात्मक कदम है। इससे ग्रामीण और आर्थिक रूप से कमजोर वर्गों को लाभ मिलेगा।

राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि महासमागम में उठाए गए EWS आरक्षण जैसे मुद्दे आगामी पंचायत और स्थानीय निकाय चुनावों में निर्णायक भूमिका निभा सकते हैं। उन्होंने कहा कि पार्टी और संगठन इस मुद्दे पर सक्रिय रूप से काम करेंगे और इसे चुनावी मंच पर प्रमुखता देंगे।

कुल मिलाकर, खेड़ली में हुए पूर्वी राजस्थान क्षत्रिय महासमागम ने EWS आरक्षण को मुख्य चुनावी मुद्दा बनाकर राज्य की राजनीतिक दिशा को स्पष्ट संदेश दिया है। शक्ति सिंह बांदीकुई और अन्य नेताओं की मांग से स्पष्ट है कि आगामी चुनावों में समाज के आर्थिक रूप से कमजोर वर्गों के अधिकार और प्रतिनिधित्व पर विशेष ध्यान दिया जाएगा।